रांची: JSSC-CGL नियुक्ति विवाद पर झारखंड हाईकोर्ट में 18 सितंबर को सुनवाई हुई. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने जांच के दौरान लोगों को समन किए जाने और निर्दोष अभ्यर्थियों को परेशान किए जाने की आशंका को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान किसी व्यक्ति को समन किया जाना उसे दोषी ठहराने के बराबर नहीं है. साथ ही अदालत ने मामले की SIT जांच की निगरानी के लिए रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को नियुक्त किया है.
जांच में कई लोगों को समन किया जा सकता है
जस्टिस दीपक रोशन ने कहा कि जांच के दौरान जांच अधिकारी या उनसे जुड़े अधिकारी जरूरत के मुताबिक कई लोगों को समन कर सकते हैं. किसी व्यक्ति को समन किया जाना उसे दोषी ठहराने के बराबर नहीं है.
कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी को मामले में तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए जरूरी लोगों को बुलाने की जरूरत पड़ सकती है. इसलिए केवल समन किए जाने के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता.
निर्दोष अभ्यर्थियों को परेशान किए जाने की आशंका भी अहम
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात को भी महत्वपूर्ण माना कि जांच के दौरान ऐसे अभ्यर्थियों को परेशान किए जाने की आशंका हो सकती है, जो वास्तव में निर्दोष हैं.
जस्टिस दीपक रोशन ने कहा कि एक तरफ जांच एजेंसी के लिए जरूरी लोगों को पूछताछ के लिए बुलाना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ उन निर्दोष लोगों की आशंका को भी ध्यान में रखना होगा, जिन्हें पहले ही कार्रवाई का सामना करना पड़ा है.
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि कुछ ऐसे अभ्यर्थी हैं जिनकी नियुक्तियां समाप्त कर दी गई थीं, लेकिन हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद वे फिलहाल अपने-अपने पदों पर बने हुए हैं.
SIT जांच की निगरानी करेंगे रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी
इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि मामले में उचित होगा कि रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी SIT की जांच की निगरानी करें.
अदालत ने जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को मामले की SIT जांच के लिए निगरानी अधिकारी के रूप में नियुक्त किया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि SIT इस न्यायिक कार्यवाही से स्वतंत्र है. निगरानी का उद्देश्य जांच को लेकर किसी भी तरह की आशंका या राज्य की जांच एजेंसी की ओर से दबाव की संभावना को दूर करना है.
SIT और जस्टिस चौधरी के बीच समन्वय करेंगे नोडल अधिकारी
कोर्ट ने श्री मलिक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है. वे SIT और रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी के बीच समन्वय का काम करेंगे.
इस व्यवस्था के तहत SIT अपनी जांच स्वतंत्र रूप से जारी रखेगी, जबकि जस्टिस चौधरी उसकी निगरानी करेंगे. अदालत का उद्देश्य जांच की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और अभ्यर्थियों की आशंकाओं को दूर करना है.
7 अक्टूबर को अगली सुनवाई
मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 7 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है.
यह मामला W.P.(S) No. 6512/2026, सुभाष मुर्मू एवं अन्य बनाम झारखंड राज्य एवं अन्य से जुड़ा है. मामला JSSC-CGL समेत भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के बाद नियुक्तियों को रद्द किए जाने और जांच से जुड़े विवाद से संबंधित है.
अब SIT की जांच रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की निगरानी में आगे बढ़ेगी और मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी.
राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट की वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा व महाधिवक्ता रोहित राय ने पक्ष रखा, जबकि प्रार्थियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री पटवालिया, पूर्व महाधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अधिवक्ता अमृतांश वत्स एवं अन्य ने पैरवी की. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी आकाश गौरव एवं अन्य, निरोज खेस एवं अन्य की ओर से अलग-अलग याचिका दायर कर राज्य सरकार की योजना को चुनौती दी गई

