आरक्षण खत्म करने की मांग को लेकर चल रही बहस के बीच लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने कहा कि देश में अब तक जितने भी आंदोलन और नारे चले हैं, उनका उद्देश्य लोगों की समस्याएं दूर करना और उनके अधिकारों का विस्तार करना रहा है, लेकिन पहली बार किसी समुदाय को मिले अधिकार को वापस लेने की मांग उठाई जा रही है.
आरक्षण खैरात नहीं, सामाजिक अन्याय की भरपाई
अरुण भारती ने कहा कि गरीबी, अशिक्षा, भेदभाव और दहेज जैसी सामाजिक बुराइयों को खत्म करने के लिए आंदोलन हुए, लोगों की पीड़ा कम करने के लिए आवाज उठाई गई. लेकिन “आरक्षण हटाओ” की मांग उन लोगों से उनका पहले से मिला अधिकार छीनने की बात करती है.
उन्होंने कहा कि आरक्षण कोई दान या खैरात नहीं है, बल्कि सामाजिक अन्याय की भरपाई का एक माध्यम है. बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान ने यह अधिकार दिया है और इसे केवल पत्र लिखकर या मांग उठाकर खत्म नहीं किया जा सकता.
LJP सांसद ने युवाओं की समस्याओं को वास्तविक बताते हुए कहा कि उनका संघर्ष अवसर बढ़ाने के लिए होना चाहिए, न कि दूसरे लोगों के मौजूदा अवसर खत्म करने के लिए. उन्होंने कहा कि बेरोजगारी और युवाओं की परेशानियों का समाधान आरक्षण समाप्त करना नहीं, बल्कि रोजगार और अवसरों का विस्तार करना है.
अरुण भारती ने मंच पर “आरक्षण हटाओ” की मांग को “आरक्षण सुधार” बताए जाने पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि यह केवल शब्दों का बदलाव नहीं, बल्कि आंदोलन के मूल संदेश को बदलने की कोशिश है. साथ ही उन्होंने संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा आरक्षण खत्म करने जैसी मांग को जायज ठहराए जाने पर भी आपत्ति जताई.
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