झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित गड़बड़ियों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच की मांग वाली याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने मामले में झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया. राज्य सरकार की ओर से मौजूद अधिवक्ता ने नोटिस स्वीकार कर लिया. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले में जल्द अगली तारीख देने का निर्देश दिया.
सीबीआई या पूर्व SC के जज से जाँच कराने की मांग
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि झारखंड में छात्र लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने या सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश से जांच कराने की मांग की.
इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जांच की प्रकृति को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि यह केवल किसी पूर्व न्यायाधीश से जांच कराने का विषय नहीं है. मामले में फोरेंसिक जांच और अन्य तकनीकी पड़ताल की जरूरत हो सकती है. ऐसी जांच किसी सक्षम एजेंसी के माध्यम से की जा सकती है.
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि क्या विवाद एक से अधिक परीक्षाओं से जुड़ा है. इस पर मनन कुमार मिश्रा ने बताया कि मामला झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा के साथ कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा से भी जुड़ा है.
झारखंड सरकार को नोटिस जारी
सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया. राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता ने नोटिस स्वीकार कर लिया. इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई के लिए जल्द तारीख तय करने का निर्देश दिया.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने का आदेश नहीं दिया है. फिलहाल अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई जल्द होगी.
यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरीशरण देवगन की ओर से अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दाखिल की गई है.
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