रांची. झारखंड में जेपीएससी, जेएसएससी और रद्द परीक्षाओं को लेकर सियासत तेज हो गई है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर जेएसएससी-सीजीएल, जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, रद्द की गई 23 परीक्षाओं और संदेह के घेरे में आई अन्य परीक्षाओं की जांच सीआईडी के बजाय सीबीआई से कराने की मांग की है. मरांडी ने कहा कि सीजीएल की जांच को लेकर सीआईडी पर ही सवाल उठ रहे हैं, ऐसे में उसी एजेंसी से इन मामलों की निष्पक्ष जांच कैसे संभव है.
मरांडी ने आरोप लगाया कि सीजीएल में गड़बड़ी को लेकर छात्र लंबे समय से शिकायत और प्रमाण देते रहे, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने सीजीएल जांच को सीमित दायरे में रखने और वास्तविक दोषियों तक नहीं पहुंचने का आरोप लगाया. पत्र में सीआईडी के कुछ अधिकारियों की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है.
जेपीएससी इंटरव्यू पर भी उठाए सवाल
मरांडी ने जेपीएससी की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा में इंटरव्यू प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने टीडीपीएल से जुड़े रामवीर सिंह और अभय तिवारी के जरिए इंटरव्यू बोर्ड को प्रभावित किए जाने के कथित दावों का जिक्र किया. इंटरव्यू में अभ्यर्थियों से कथित वसूली के मामले में तत्कालीन जेपीएससी सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य के निजी सहायक ब्रजराम की गिरफ्तारी का भी उल्लेख किया.
उन्होंने इंटरव्यू बोर्ड के गठन, अभ्यर्थियों के आवंटन, कथित कोडिंग-डिकोडिंग, अंकों, डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और वित्तीय लेन-देन की स्वतंत्र जांच की मांग की है.
23 रद्द परीक्षाओं की जांच पर भी सवाल
मरांडी ने कहा कि सरकार ने रद्द की गई 23 परीक्षाओं की जांच भी सीआईडी को सौंपी है. उनका कहना है कि जब सीजीएल जांच को लेकर सीआईडी की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, तो उन्हीं परिस्थितियों में अन्य परीक्षाओं की जांच भी उसे सौंपना उचित नहीं है. उन्होंने सीबीआई या किसी अन्य स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की.
आठ बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग
मरांडी ने सीबीआई जांच के अलावा इंटरव्यू बोर्ड में शामिल अधिकारियों की भूमिका की जांच, संबंधित दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित करने, कथित अवैध वसूली की जांच और संदेह के घेरे में आए अधिकारियों को जांच से अलग करने की मांग की है.
उन्होंने कहा कि मामला सिर्फ परीक्षाओं का नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य और नियुक्ति व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा है.


