राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में SIT की फाइनल रिपोर्ट सामने आ गई है. जांच में मंदिर ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट मिल गई है. गड़बड़ी पकड़ने के लिए SIT यानी विशेष जांच दल को लगया गया था. यह कोई अलग पुलिस एजेंसी नहीं थी, बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष टीम बनाकर जांच की थी.
इस टीम का काम सिर्फ यह पता लगाना नहीं था कि चढ़ावे की रकम किसने निकाली, बल्कि यह भी देखना था कि चोरी कैसे हुई, कौन-कौन इसमें शामिल था, काउंटिंग सेंटर की व्यवस्था क्या थी, CCTV की निगरानी कैसे होती थी और मंदिर की रकम की सुरक्षा में कहीं लापरवाही तो नहीं हुई. यानी SIT को पूरे मामले की कड़ी जोड़ने का काम दिया गया था.
मामला आखिर सामने कैसे आया?
राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे की रकम की गिनती एक निर्धारित काउंटिंग सेंटर में होती थी. इसी दौरान कथित तौर पर कुछ कर्मचारियों के पैसे निकालने का मामला सामने आया. जांच के दौरान CCTV फुटेज खंगाली गई. SIT को आरोपियों की संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं. जांच में 27 अप्रैल से 5 जून के बीच कई मौकों पर चढ़ावे की रकम निकाले जाने के सबूत मिलने की बात सामने आई.
यानी मामला किसी एक दिन की कथित चोरी का नहीं था. जांच में कई बार रकम निकाले जाने की बात सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया.
CCTV से खुलती गई परतें
SIT ने काउंटिंग सेंटर की CCTV फुटेज को जांच का अहम आधार बनाया. आरोप है कि चढ़ावे की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारी नकदी निकालकर अपने पास रखते थे. जांच आगे बढ़ी तो सिर्फ पैसे निकालने की बात ही नहीं, बल्कि काउंटिंग सेंटर की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठे. यहीं से जांच का दायरा बढ़ा और SIT ने मंदिर ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से भी पूछताछ शुरू की.
चंपत राय और अनिल मिश्रा मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं. इसलिए SIT ने यह जानने की कोशिश की कि चढ़ावे की गिनती और सुरक्षा की पूरी व्यवस्था कैसे चलती थी. मसलन, कर्मचारियों की तैनाती कैसे होती थी, काउंटिंग सेंटर में निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी, CCTV की मॉनिटरिंग कैसे होती थी और नकदी की सुरक्षा के क्या इंतजाम थे.

यानी दोनों से पूछताछ का मतलब यह नहीं था कि SIT ने उन्हें पहले ही आरोपी मान लिया था. जांच का मकसद उनकी भूमिका को भी स्पष्ट करना था.
जांच में आठ लोग आरोपी
जांच आगे बढ़ने के बाद आठ लोगों को आरोपी बनाया गया और गिरफ्तारियां हुईं. SIT की फाइनल रिपोर्ट में भी इन्हीं आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का आधार बताया गया है. इस रिपोर्ट में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू को आरोपी बताया गया है.
वहीं, चंपत राय और अनिल मिश्रा के खिलाफ कथित चढ़ावा चोरी में आपराधिक भूमिका नहीं मिलने की बात रिपोर्ट में सामने आई है. इस तरह SIT की जांच में मंदिर ट्रस्ट के इन दोनों बड़े पदाधिकारियों को कथित चोरी के मामले में क्लीन चिट मिल गई.
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई. अदालत ने SIT से जांच की स्टेटस रिपोर्ट मांगी और जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने को कहा. इससे साफ है कि मामला सिर्फ स्थानीय स्तर की पुलिस जांच तक सीमित नहीं रहा. अब जांच में सामने आए तथ्यों और आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी.

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