रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने बिजली बकाया से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में साफ किया है कि नीलामी के जरिए संपत्ति खरीदने वाले ऐसे खरीदार, जिनका पुराने उपभोक्ता से कोई संबंध नहीं है, उन्हें पूर्व मालिक के बिजली बकाये का भुगतान करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने मामले में मंगलम इस्पात को राहत देते हुए दामोदर वैली कॉरपोरेशन (DVC) को पुराने उपभोक्ता के नाम का जमा कराया गया बकाया वापस करने का निर्देश दिया है. साथ ही करीब 1.34 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बिजली बकाये की मांग को भी रद्द कर दिया है.
यह फैसला जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने W.P.(C) No. 2089 of 2019 और W.P.(C) No. 2639 of 2025 में सुनाया. आदेश 13 जुलाई 2026 को रिजर्व किया गया था और 4 अगस्त 2026 को सुनाया गया. दोनों याचिकाओं में मंगलम इस्पात ने DVC की ओर से पुराने उपभोक्ता के बिजली बकाये को नए मालिक से वसूलने की कार्रवाई को चुनौती दी थी.
क्या है पूरा मामला
मंगलम इस्पात ने 2018 में पंजाब नेशनल बैंक की ओर से आयोजित ई-नीलामी में श्री हनुमान एलॉयज प्राइवेट लिमिटेड की संपत्ति खरीदी थी. पुरानी कंपनी का कर्ज एनपीए होने के बाद बैंक ने उसकी संपत्तियों को वसूली प्रक्रिया के तहत नीलामी में रखा था. संपत्ति खरीदने के बाद मंगलम इस्पात ने DVC से नया बिजली कनेक्शन मांगा.
DVC ने नया कनेक्शन देने से पहले पुराने उपभोक्ता के नाम बकाया बिजली बिल चुकाने की मांग की. यह बकाया करीब 4.92 करोड़ रुपये था. मंगलम इस्पात का कहना था कि उसका पुराने उपभोक्ता से कोई संबंध नहीं है और उसने सिर्फ बैंक की नीलामी में संपत्ति खरीदी है.
बिजली कनेक्शन की जरूरत के कारण मंगलम इस्पात ने अदालत के अंतरिम आदेश के बाद यह रकम किस्तों में जमा की और 2019 में नया बिजली कनेक्शन हासिल किया. इसके बाद 2025 में DVC ने 2006 से 2012 की अवधि के लिए टैरिफ संशोधन के आधार पर 1,34,03,401 रुपये की अतिरिक्त मांग भी कर दी. इसे भी कंपनी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी.
कोर्ट ने क्या कहा
हाईकोर्ट ने माना कि इस मामले में संपत्ति सीधे पुराने मालिक से खरीदकर नहीं ली गई थी, बल्कि वित्तीय संस्था की ओर से की गई सार्वजनिक नीलामी के जरिए मंगलम इस्पात को मिली थी. कंपनी का पुराने उपभोक्ता से कोई संबंध भी नहीं था. ऐसे में झारखंड स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन की इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कोड रेगुलेशन 2015 की धारा 6.10(a) लागू होगी.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस प्रावधान के तहत पुराने उपभोक्ता के बकाये की वसूली ऐसे नए खरीदार से नहीं की जा सकती, जिसका पुराने मालिक या उपभोक्ता से कोई संबंध नहीं है.
अदालत ने यह भी पाया कि नीलामी विज्ञापन में संपत्ति को “as is where is” आधार पर बेचे जाने का उल्लेख नहीं था. इसके अलावा बिक्री प्रमाणपत्र में संपत्ति को “free from all encumbrances” बताया गया था. इसलिए DVC की यह दलील भी स्वीकार नहीं की गई कि खरीदार को सभी लंबित देनदारियों की जानकारी थी.
DVC को रकम लौटाने का निर्देश
हाईकोर्ट ने मंगलम इस्पात के पक्ष में दोनों याचिकाओं को मंजूर कर लिया. DVC को निर्देश दिया गया कि पुराने उपभोक्ता के बिजली बकाये के रूप में मंगलम इस्पात से जमा कराई गई पूरी राशि पांच बराबर तिमाही किस्तों में वापस की जाए. पहली किस्त छह सप्ताह की अवधि समाप्त होने के बाद देय होगी.
वहीं, 1 फरवरी 2025 को जारी 1,34,03,401 रुपये के डिमांड नोटिस को भी कोर्ट ने रद्द कर दिया.
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