दिल्ली में CJP के छात्र प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों के लिए खाना-पानी का इंतजाम करने वाले वॉलंटियर जुनैद मलिक ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. जुनैद ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने उन्हें जबरन उठाया, कई घंटे तक एक गाड़ी में बैठाकर रखा और धमकाया. इसके बाद उन्हें दिल्ली से काफी दूर देहरादून रोड की तरफ छोड़ दिया गया.
5-6 घंटे तक गाड़ी में रखने और धमकाने का आरोप
जुनैद के मुताबिक, वह दिल्ली के RML अस्पताल से एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाकर लौट रहे थे. इसी दौरान पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया और अपने साथ ले गए. उनका आरोप है कि उन्हें करीब 5-6 घंटे तक एक वाहन में रखा गया. इस दौरान पुलिस ने उन्हें डराया-धमकाया और प्रदर्शनकारियों को खाना-पानी उपलब्ध कराने के लिए मिलने वाली फंडिंग को लेकर पूछताछ की.
जुनैद का दावा है कि पुलिस ने उनका मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में लिया और उसे अनलॉक कराकर उसकी जांच की. उनका कहना है कि वह प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था लोगों से मिलने वाले सहयोग और डोनेशन के जरिए कर रहे थे. जुनैद ने आरोप लगाया कि कई घंटे तक हिरासत में रखने के बाद उन्हें दिल्ली से दूर देहरादून रोड की तरफ एक जगह पर छोड़ दिया गया, जिसके बाद उन्हें खुद कैब लेकर वापस दिल्ली आना पड़ा.
गाजियाबाद में पिता और मेरठ में रिश्तेदारों को हिरासत में लेने का आरोप
जुनैद ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया है कि उनके कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने के दौरान गाजियाबाद में उनके घर पर पुलिस पहुंची. उनका दावा है कि पुलिस ने उनके पिता को हिरासत में लिया और घर की तलाशी ली. परिवार की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने कुछ जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में लिए.
जुनैद का यह भी आरोप है कि पुलिस उनकी शादीशुदा बहन के मेरठ स्थित घर पहुंची और वहां से उनकी बहन के ससुर और भाई-इन-लॉ को अपने साथ ले गई. हालांकि, मेरठ पुलिस ने परिवार के लोगों को हिरासत में लेने के आरोप से इनकार किया है. ऐसे में इस मामले में जुनैद और पुलिस के दावों में विरोधाभास है.
सुप्रीम कोर्ट से परिवार के खिलाफ coercive action रोकने की मांग
जुनैद ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि पुलिस को उनके और उनके परिवार के खिलाफ किसी भी तरह की coercive action यानी जबरन या दबाव बनाने वाली कार्रवाई से रोका जाए. उनका कहना है कि अगर पुलिस को उनसे या उनके परिवार से पूछताछ करनी है तो पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाए.
यह मामला उस बड़ी सुनवाई से जुड़ गया है जिसमें CJP छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित ज्यादती को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं. जुनैद की शिकायत में मुख्य सवाल यह उठाया गया है कि क्या पुलिस ने उन्हें और उनके परिवार को हिरासत में लेने या पूछताछ करने के दौरान कानूनी प्रक्रिया का पालन किया था.
जुनैद की ओर से लगाए गए आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. दिल्ली पुलिस की ओर से मामले को देखने की बात कही गई है, जबकि मेरठ पुलिस ने परिवार के सदस्यों को हिरासत में लेने के आरोप से इनकार किया है.
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