Jamtara (Rajiv Jha) : शहर के कायस्थ पाड़ा स्थित सरस्वती मंदिर में आर्ट ऑफ लिविंग जामताड़ा परिवार की ओर से आयोजित पांच दिवसीय “हैप्पीनेस कार्यक्रम” का उत्साह और आध्यात्मिक माहौल के बीच समापन हो गया। इस कार्यक्रम में नए और पुराने मिलाकर करीब 15 साधकों ने भाग लिया। पांच दिनों तक चले इस शिविर में प्रतिभागियों ने सुदर्शन क्रिया, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया। साथ ही मानसिक तनाव को कम करने, सकारात्मक सोच विकसित करने और जीवन को बेहतर तरीके से जीने के कई सरल उपाय भी सीखे। कार्यक्रम के दौरान पूरे परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का माहौल देखने को मिला। प्रतिभागियों ने बताया कि कोर्स के दौरान उन्हें न सिर्फ मानसिक शांति मिली, बल्कि दैनिक जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए नई सोच और आत्मविश्वास भी मिला।
सुदर्शन क्रिया और प्राणायाम का कराया गया अभ्यास
पांच दिवसीय शिविर में आर्ट ऑफ लिविंग की विशेष श्वास तकनीक “सुदर्शन क्रिया” का अभ्यास कराया गया। इसके अलावा योग, प्राणायाम और ध्यान की विभिन्न विधियों से भी प्रतिभागियों को परिचित कराया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि नियमित रूप से इन अभ्यासों को अपनाने से तनाव कम होता है और मन शांत रहता है। शिविर में भावनात्मक संतुलन, तनाव प्रबंधन, आत्मविश्वास बढ़ाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ सभी गतिविधियों में हिस्सा लिया।
खुश रहना इंसान का स्वभाव है : राजेंद्र गोराई
कार्यक्रम का संचालन आर्ट ऑफ लिविंग जामताड़ा के वरिष्ठ प्रशिक्षक राजेंद्र गोराई ने किया। समापन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अधिकांश लोग तनाव, चिंता और मानसिक दबाव से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में सुदर्शन क्रिया, योग और प्राणायाम लोगों को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि खुश रहना इंसान का स्वभाव है, लेकिन जीवन की परेशानियों के बीच लोग इसे भूल जाते हैं। हैप्पीनेस कोर्स लोगों को हर परिस्थिति में सकारात्मक बने रहने और मुस्कुराते हुए आगे बढ़ने की सीख देता है। नियमित साधना से व्यक्ति के भीतर नई ऊर्जा का संचार होता है और उसका जीवन के प्रति नजरिया भी बेहतर बनता है।
कोर्स के बाद भी साधना जारी रखने की सलाह
समापन समारोह में आर्ट ऑफ लिविंग की वरिष्ठ प्रशिक्षक डॉ. संध्या सिन्हा मुख्य अतिथि और अभिभावक के रूप में मौजूद रहीं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कोर्स पूरा होने के बाद भी साधना की निरंतरता बनाए रखना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर लोग नियमित रूप से ध्यान, प्राणायाम और सुदर्शन क्रिया का अभ्यास करते रहेंगे तो उन्हें लंबे समय तक इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने साधकों को स्थानीय प्रशिक्षकों के संपर्क में बने रहने और साधना, सेवा व सत्संग को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी।
अगले महीने फिर होगा हैप्पीनेस कोर्स
आर्ट ऑफ लिविंग जामताड़ा के जिला मीडिया कोऑर्डिनेटर विजय भगत ने बताया कि कार्यक्रम को लोगों का अच्छा सहयोग और सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। इसी को देखते हुए अगले महीने फिर से हैप्पीनेस कोर्स आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज के समय में मानसिक तनाव तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में इस तरह के कार्यक्रम लोगों को तनावमुक्त और खुशहाल जीवन जीने की दिशा दिखाते हैं। संस्था का प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस अभियान से जुड़ें और इसका लाभ उठाएं।
भजन और सत्संग में झूमे साधक
कार्यक्रम के अंतिम दिन माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया। नए और पुराने साधकों ने मिलकर गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के भजनों पर भक्ति भाव से हिस्सा लिया। सत्संग के दौरान सभी ने एक-दूसरे के साथ अपने अनुभव साझा किए और खुशियां बांटी। इस मौके पर प्रतिभागियों के बीच उपहारों का आदान-प्रदान भी किया गया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
आयोजन को सफल बनाने में कई लोगों का योगदान
कार्यक्रम को सफल बनाने में इंदु प्रभा, रीना द्विवेदी, राम विनय सिंह, रीता घोष और छवि घोष समेत कई सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन से लेकर प्रतिभागियों की सुविधा और व्यवस्थाओं तक सभी कार्यों को मिलकर बेहतर ढंग से पूरा किया गया। समापन समारोह में रीना द्विवेदी, इंदु प्रभा, शारदा, प्रतिमा, श्रीकांत प्रसाद, राम विनय सिंह, पूर्णिमा गोराई, रीता घोष, चुमकी दास, छवि घोष, अंजू भगत और विजय भगत सहित बड़ी संख्या में सदस्य और साधक मौजूद रहे। कार्यक्रम के समापन के साथ सभी ने भविष्य में भी नियमित रूप से साधना और सत्संग से जुड़े रहने का संकल्प लिया।

