New Delhi : भारत और न्यूजीलैंड के व्यापारिक संबंधों में आज, 27 अप्रैल 2026 को एक नए युग की शुरुआत हुई है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ (FTA) पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए गए हैं। यह समझौता न केवल दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को नई गति देगा, बल्कि निवेश के भी द्वार खोलेगा।
16 साल लंबा सफर और अब नई शुरुआत
भारत और न्यूजीलैंड के बीच इस व्यापारिक समझौते की नींव 2010 में पड़ी थी। नौ दौर की बातचीत के बाद 2015 में यह प्रक्रिया ठप हो गई थी, जिसे मार्च 2025 में फिर से पटरी पर लाया गया। लंबी वार्ता के बाद 22 दिसंबर 2025 को बातचीत पूरी हुई और आज, 27 अप्रैल 2026 को इसे औपचारिक रूप दे दिया गया है।
भारत को मिलने वाले बड़े फायदे
70% सामान ड्यूटी-फ्री: कपड़ा, चमड़ा, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग उत्पादों पर न्यूजीलैंड में कोई आयात शुल्क नहीं लगेगा। इससे भारतीय सामान वहां सस्ते होंगे और प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा। हथकरघा, हस्तशिल्प और ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) जैसी योजनाओं को वैश्विक स्तर पर बड़ी पहचान मिलेगी। कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए अस्थायी रोजगार वीजा का नया कोटा तय किया गया है, जिसके तहत हर साल 5,000 लोगों को तीन साल तक काम करने की अनुमति मिलेगी।
भारतीय दवाओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया आसान होगी। इसके अलावा, पहली बार किसी पश्चिमी देश के साथ समझौते में आयुर्वेद, योग और यूनानी चिकित्सा (AYUSH) के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। न्यूजीलैंड को भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। भारत ने अपनी करीब 70.03% टैरिफ लाइनों को न्यूजीलैंड के लिए खोलने पर सहमति दी है। सस्ते प्रीमियम फल: कीवी, एवोकाडो और ब्लूबेरी जैसे प्रीमियम फलों पर आयात शुल्क कम होगा, जिससे भारतीय मध्यम वर्ग के लिए ये उत्पाद अधिक किफायती हो जाएंगे।
‘न्यूजीलैंड एग्री-टेक्नोलॉजी एक्शन प्लान’ के तहत न्यूजीलैंड के विशेषज्ञ भारतीय किसानों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देंगे, जिससे फलों और फसलों की पैदावार में सुधार होगा। यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश का भी एक बड़ा माध्यम है। न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) करने का वादा किया है।
अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 के बीच न्यूजीलैंड का कुल निवेश मात्र 8.9 करोड़ डॉलर था, ऐसे में यह निवेश प्रतिबद्धता भारत की आर्थिक रणनीति के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को एक-दूसरे के करीब लाएगा और आने वाले समय में द्विपक्षीय व्यापार के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।
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