Ranchi : झारखंड-बिहार-छत्तीसगढ़ कॉरिडोर में सक्रिय बचे हुए अंतिम बड़े माओवादी कमांडर मनोहर गंझू उर्फ सोहन गंझू पर सुरक्षाबलों ने बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। झारखंड पुलिस ने उसे अपने टारगेट पर लेते हुए इलाके में घेराबंदी तेज कर दी है। लातेहार जिले के बालूमाथ थाना क्षेत्र के नगरटोला गांव का रहने वाला मनोहर गंझू माओवादियों का जोनल कमांडर बताया जाता है। उस पर सरकार ने 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। फिलहाल वह चतरा, पलामू और लातेहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय है।
कॉरिडोर में रणनीतिक रूप से सक्रिय रहा है नेटवर्क
जिस इलाके में मनोहर सक्रिय है, वह झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाला माओवादी कॉरिडोर माना जाता है। इसी क्षेत्र से संगठन की गतिविधियों का संचालन होता रहा है। बताया जा रहा है कि वह एके-47 जैसे हथियारों के साथ चलता है और कई नक्सली नेटवर्क को संभालता रहा है। हाल ही में हजारीबाग क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में चार माओवादी कमांडरों के मारे जाने के बाद मनोहर और उसकी टीम अलग हो गई थी। एक टीम हजारीबाग की ओर चली गई, जबकि मनोहर सीमावर्ती इलाके में सक्रिय रहा।
पुलिस का सख्त अभियान, सरेंडर की अपील
पलामू रेंज के डीआईजी ने बताया कि सुरक्षाबलों का अभियान लगातार जारी है और माओवादियों से आत्मसमर्पण की अपील की जा रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग सरेंडर नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के अनुसार, मनोहर की गिरफ्तारी या मारे जाने के बाद इस कॉरिडोर में माओवादियों के पास कोई बड़ा कमांडर नहीं बचेगा।
टीएसपीसी से जुड़े नेटवर्क के भी संकेत
जानकारी के अनुसार मनोहर गंझू प्रतिबंधित नक्सली संगठन टीएसपीसी के भी संपर्क में रहा है। 2022 के बाद से उसने माओवादी और टीएसपीसी के बीच समन्वय की कोशिशें भी की थीं। पलामू-चतरा सीमावर्ती इलाके में कई बैठकों की भी जानकारी सामने आई है। यह इलाका अफीम की खेती, कोयला और केन पत्ता तस्करी के कारण लंबे समय से नक्सली गतिविधियों का केंद्र रहा है।
70 से अधिक नक्सली हमलों में संलिप्तता का आरोप
मनोहर गंझू पर झारखंड और बिहार में 70 से अधिक बड़े नक्सली हमलों में शामिल होने का आरोप है। वह आईईडी विशेषज्ञ भी माना जाता है। 2004 से लेकर अब तक वह कई बड़े हमलों में शामिल रहा है। 2016-17 में बिहार के गया और औरंगाबाद में हुए हमलों में कोबरा बटालियन के 10 जवान शहीद हुए थे, जिसमें उसकी भूमिका बताई जाती है। 2011 में पलामू में हुए लैंडमाइन विस्फोट में भी दो जवान शहीद हुए थे।
2023 में बड़े ऑपरेशन से बच निकला था
3 अप्रैल 2023 को चतरा के जंगलों में सुरक्षाबलों के साथ भीषण मुठभेड़ में माओवादी कमांडर गौतम पासवान समेत पांच नक्सली मारे गए थे। उस समय मनोहर गंझू वहां से भाग निकलने में सफल रहा था। इसके बाद से वह इस कॉरिडोर का सबसे बड़ा सक्रिय कमांडर माना जा रहा है।
इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
पुलिस और सुरक्षाबलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है। हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि जल्द ही इस नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में कार्रवाई तेज की जाएगी।
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