Ranchi : छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में मंगलवार दोपहर हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट ने कई परिवारों को उजाड़ दिया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 19 मजदूरों की मौत हो चुकी है। इनमें 4 की मौके पर ही जान चली गई, जबकि 13 ने रायगढ़ के अलग-अलग अस्पतालों में दम तोड़ा। वहीं 2 मजदूरों की मौत रायपुर के कालड़ा अस्पताल में इलाज के दौरान हुई।
झारखंड के तीन परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
इस हादसे में झारखंड के तीन युवकों की मौत ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। बेरमो के गांधीनगर थाना क्षेत्र के कुरपनिया मिल्लत नगर निवासी 26 वर्षीय अब्दुल करीम की मौके पर ही मौत हो गई। वह अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले थे। उनकी शादी अभी 23 मार्च को ही हुई थी और 25 मार्च को रिसेप्शन हुआ था। इसके अलावा सिंदरी के रोहड़ाबांध निवासी 43 वर्षीय तरुण कुमार ओझा और पलामू के अशोक परहिया की भी इस हादसे में जान चली गई।
36 झुलसे, कई की हालत गंभीर
ब्लास्ट इतना जोरदार था कि कुल 36 मजदूर झुलस गए। इनमें से 18 घायलों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। कई की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिससे मौत का आंकड़ा बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
हादसे के बाद परिजनों का हंगामा
घटना के बाद प्लांट के बाहर मजदूरों के परिजनों ने जमकर हंगामा किया। उनका आरोप है कि प्रबंधन सही जानकारी नहीं दे रहा है और कई मजदूर अब भी लापता हैं। परिजनों ने दोषियों पर कार्रवाई और उचित मुआवजे की मांग की।
जांच के आदेश, जिम्मेदारी तय होगी
मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि हादसे के कारणों की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मुआवजे का ऐलान
वेदांता प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपए और एक सदस्य को नौकरी देने का ऐलान किया है। घायलों को 15-15 लाख रुपए की सहायता दी जाएगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिवार को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए देने की घोषणा की गई है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी घटना पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए देने की घोषणा की है।
लापता मजदूरों की तलाश जारी
हादसे के बाद से कुछ मजदूरों के लापता होने की खबर है। राहत और बचाव कार्य जारी है, जबकि परिजन अपनों की तलाश में अस्पतालों और प्लांट के बाहर भटक रहे हैं। यह हादसा एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
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