Ranchi : झारखंड के रांची जिले में जीईएल चर्च के विश्वासियों ने ईस्टर संडे के मौके पर गोस्सनर कंपाउंड स्थित कब्रिस्तान में विशेष आराधना में हिस्सा लिया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने अपने दिवंगत परिजनों की कब्रों पर फूल चढ़ाए, मोमबत्तियां जलाईं और उनके लिए प्रार्थना की। पूरा माहौल श्रद्धा और भक्ति में डूबा नजर आया।
सुबह तीन बजे से शुरू हुई आराधना
ईस्टर की आराधना सुबह तड़के तीन बजे पहली घंटी के साथ शुरू हुई। इसके बाद 3:30 बजे दूसरी घंटी बजते ही स्मरण पत्थर से कब्रिस्तान तक एक भव्य प्रोसेशन निकाला गया। प्रोसेशन के बाद सामूहिक आराधना का आयोजन हुआ।
बिशप सीमांत तिर्की ने दिया संदेश
आराधना का संचालन रेव्ह. अनूप जॉली भेंगरा ने किया, जबकि उपदेश बिशप सीमांत तिर्की ने दिया। उन्होंने अपने संदेश में प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान के महत्व को बताया और कहा कि यह दिन विश्वास, आशा और विजय का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रभु यीशु ने मृत्यु पर विजय पाकर मानवता को नया जीवन दिया है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हर अंधकार के बाद प्रकाश आता है और हर निराशा के बाद आशा जन्म लेती है।
आशा और नई शुरुआत का संदेश
बिशप ने कहा कि पुनरुत्थान का अर्थ सिर्फ एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि जीवन में नई शुरुआत का संदेश है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने जीवन में भी इस शक्ति को अपनाएं और दूसरों के लिए आशा का कारण बनें।
श्रद्धालुओं में दिखा गहरा भाव
आराधना के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कब्रिस्तान में मोमबत्तियों की रोशनी और प्रार्थनाओं की आवाज ने माहौल को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया।
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