Ranchi : प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के वरिष्ठ नेता और पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ किशन दा का निधन हो गया है। शुक्रवार की सुबह 6 बजे अचानक प्रशांत बोस की तबियत बिगड़ी। उन्हें सांस लेने में समस्या आने लगी। आनन फानन में उसे इलाज के लिए रिम्स भेजा गया। डॉक्टरों की टीम प्रशांत बोस का इलाज कर रही थी। जहां सुबह करीब 10 बजे डॉक्टर की टीम ने मौत की पुष्टि कर दी। इधर, घटना के बाद मजिस्ट्रेट की नियुक्ति हुई है।
संगठन में दुसरे नंबर पर थे प्रशांत बोस
प्रशांत बोस नक्सली संगठन के शीर्ष नेताओं में गिने जाते थे। उन्हें संगठन में महासचिव नंबला केशव राव के बाद दूसरा सबसे बड़ा नेता माना जाता था। वे भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के अहम सदस्य रहे थे।
‘किशन दा’ नाम से थे मशहूर
नक्सली संगठन में प्रशांत बोस को ‘किशन दा’ के नाम से जाना जाता था। वे मूल रूप से पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे और लंबे समय तक संगठन की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे।
MCC से माओवादी तक का सफर
किशन दा पहले माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर ऑफ इंडिया (MCCI) के प्रमुख रहे थे। साल 2004 में एमसीसीआई और पीपुल्स वार (PW) के विलय के बाद जब भाकपा माओवादी का गठन हुआ, तब वे नए संगठन के पोलित ब्यूरो में शामिल किए गए।
1 करोड़ के इनामी नक्सली थे
प्रशांत बोस को 12 नवंबर 2021 को सरायकेला-खरसावां जिले से उनकी पत्नी शीला मरांडी के साथ गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के समय उन पर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था, जिससे उनकी अहमियत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
उम्र 75 साल से अधिक
प्रशांत बोस की उम्र 75 साल से ज्यादा थी। लंबे समय से वे जेल में बंद थे।उनकी मौत के बाद सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि वे संगठन के बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक नेता माने जाते थे।
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