Latehar : लातेहार जिले में उग्रवादियों के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच गुरुवार को पुलिस को बड़ी सफलता मिली। प्रतिबंधित संगठन जेजेएमपी का सबजोनल कमांडर सुरेंद्र लोहरा उर्फ टाइगर जी उर्फ विनोद लोहरा ने आखिरकार हथियार छोड़ दिए। उसने लातेहार पुलिस ऑफिस में आत्मसमर्पण किया और मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया।
आईजी और एसपी के सामने किया सरेंडर
पुलिस ऑफिस में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सुरेंद्र लोहरा ने पलामू प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक शैलेंद्र कुमार सिन्हा, लातेहार एसपी कुमार गौरव और सीआरपीएफ 11वीं बटालियन के कमांडेंट यादराम बुनकर के सामने सरेंडर किया। आईजी ने उसे माला पहनाकर और बुके देकर स्वागत किया। साथ ही सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत 5 लाख रुपये का प्रतीकात्मक चेक भी सौंपा गया।
पत्नी की समझाइश से लिया बड़ा फैसला
इस पूरे मामले में सबसे अहम भूमिका उसकी पत्नी की रही। आईजी ने खुद बताया कि परिवार, खासकर पत्नी के समझाने पर सुरेंद्र लोहरा ने यह फैसला लिया। लंबे समय तक जंगल में रहने के बाद उसने अब सामान्य जिंदगी जीने का रास्ता चुना है।
पुलिस ने समन्वित कार्रवाई को बताया सफलता की वजह
आईजी शैलेंद्र सिन्हा ने इस सफलता का श्रेय लातेहार पुलिस और सीआरपीएफ के संयुक्त प्रयासों को दिया। उन्होंने एसपी और कमांडेंट को बधाई भी दी। साथ ही क्षेत्र के अन्य उग्रवादियों से अपील की कि वे भी हिंसा छोड़कर सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं।
20 साल से सक्रिय, कई संगीन मामले दर्ज
सुरेंद्र लोहरा पिछले करीब 20 वर्षों से उग्रवादी गतिविधियों में सक्रिय था। उसके खिलाफ लातेहार, चंदवा और हेरहंज थाना क्षेत्रों में आठ संगीन मामले दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार, सरकार की नई नीति और लगातार दबाव के कारण उसने आत्मसमर्पण का रास्ता चुना।
अभियान का असर, लगातार सरेंडर और गिरफ्तारी
आईजी ने बताया कि साल 2025 में 23 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया था और 2026 में भी यह सिलसिला जारी है। हाल ही में 10 लाख के इनामी माओवादी मृत्युंजय भुईया और 2 लाख के इनामी बबलू राम को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।
मुख्यधारा में लौटने की कोशिश
करीब दो दशक तक जंगल और बंदूक की जिंदगी जीने के बाद अब सुरेंद्र लोहरा ने समाज में लौटने का फैसला किया है। पुलिस का कहना है कि ऐसे कदम न सिर्फ शांति बहाल करते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी एक संदेश बनते हैं।
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