Jamtara : जामताड़ा, जिसे देशभर में साइबर क्राइम का गढ़ माना जाता है, वहां युवाओं को सही दिशा देने के लिए एक बड़ी पहल शुरू की गई थी। हर पंचायत में सामुदायिक पुस्तकालय खोले गए, ताकि बच्चे और युवा पढ़ाई से जुड़ें और गलत रास्ते से दूर रहें।
लेकिन अब वही पुस्तकालय खुद बदहाली की कहानी बन गए हैं।
हर पंचायत में खुले थे 118 पुस्तकालय
जिले की 118 पंचायतों में सामुदायिक पुस्तकालय खोले गए थे। सोच यह थी कि गांव के बच्चे यहां आकर पढ़ाई करेंगे, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करेंगे और शिक्षा के जरिए आगे बढ़ेंगे। लेकिन जमीन पर तस्वीर पूरी तरह उलट नजर आ रही है।
अधिकतर पुस्तकालय बंद, देखभाल करने वाला कोई नहीं
आज हालत यह है कि ज्यादातर पुस्तकालय बंद पड़े हैं। कहीं-कहीं कभी-कभार खुलते हैं, लेकिन नियमित संचालन नहीं हो रहा।
ना कोई अधिकारी देखने आता है, ना कोई जिम्मेदारी लेने वाला नजर आता है। लाखों रुपए खर्च कर बनाए गए ये भवन अब वीरान पड़े हैं।
पहले रहती थी हलचल, अब पसरा सन्नाटा
जब यह योजना शुरू हुई थी, तब शिक्षक, पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक पदाधिकारी भी समय निकालकर पुस्तकालय पहुंचते थे और बच्चों के बीच पढ़ाई को बढ़ावा देते थे। लेकिन तत्कालीन उपायुक्त के स्थानांतरण के बाद धीरे-धीरे यह पहल कमजोर पड़ गई और अब लगभग ठप हो गई है।
ग्रामीणों की नाराजगी, बोले- अब कोई देखने वाला नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि पुस्तकालय अब सिर्फ नाम के रह गए हैं। गोपालपुर पंचायत के पूर्व मुखिया मनोज सोरेन बताते हैं कि पहले यहां गतिविधियां होती थीं, लेकिन अब पुस्तकालय बंद रहता है और कोई इसकी सुध लेने वाला नहीं है।
युवाओं के लिए जरूरी, लेकिन उपयोग नहीं हो पा रहा
स्थानीय समाजसेवी और बुद्धिजीवी भी इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि ये पुस्तकालय बेरोजगार युवाओं और छात्रों के लिए बहुत काम के हो सकते थे। लेकिन सही संचालन नहीं होने से इसका फायदा लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
ग्रामीणों की मांग- फिर से शुरू हो संचालन
गांव के लोग चाहते हैं कि पहले की तरह पुस्तकालय फिर से नियमित रूप से चलें। उनका कहना है कि भवन तो बन गए, लेकिन अगर उनमें गतिविधियां नहीं होंगी, तो इसका कोई मतलब नहीं रह जाता।
प्रशासन बोला- कमेटी बनी है, होगी समीक्षा
इस मामले में प्रखंड विकास पदाधिकारी अवेश्वर मुर्मू का कहना है कि पुस्तकालयों के संचालन के लिए स्थानीय कमेटी बनाई गई है।
अगर कहीं पुस्तकालय बंद हैं, तो इसकी समीक्षा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई भी होगी।
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