Dhanbad :जिले से एक अहम मामला सामने आया है, जहां उपभोक्ता फोरम ने सख्त रुख अपनाते हुए अंचल अधिकारी (सीओ) की सैलरी रोकने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई लंबे समय से जमीन विवाद से जुड़ी रिपोर्ट नहीं देने पर की गई है। इस फैसले के बाद जिला प्रशासन में हलचल मच गई है।
बार-बार निर्देश के बावजूद रिपोर्ट नहीं सौंपी
मामले की सुनवाई के दौरान फोरम ने पाया कि अंचल अधिकारी रामप्रवेश कुमार को कई बार निर्देश दिए गए थे कि जमीन से जुड़ी स्थिति पर स्पष्ट रिपोर्ट दी जाए। फोरम यह जानना चाहती थी कि संबंधित जमीन रैयती है या गैर आबाद श्रेणी में आती है। लेकिन तय समय सीमा के बावजूद रिपोर्ट नहीं दी गई, जिससे केस की सुनवाई प्रभावित हुई। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए फोरम ने वेतन रोकने का आदेश जारी कर दिया।
जिला प्रशासन को भी सख्त निर्देश
उपभोक्ता फोरम ने अपने आदेश में जिला प्रशासन को भी स्पष्ट कहा है कि इस फैसले का पालन तुरंत सुनिश्चित किया जाए। आदेश की प्रति उपायुक्त आदित्य रंजन और संबंधित सीओ को भेज दी गई है। इस कदम के बाद प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है कि अब लापरवाही पर सीधे कार्रवाई हो रही है।
पूरा मामला क्या है
यह मामला धनबाद के भूली इलाके की रहने वाली इंदिरा कुमारी की शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने साल 2018 में लुबी सर्कुलर रोड स्थित एसएसएलएनटी कॉलेज के पास एक बिल्डर से करीब 1400 वर्ग फीट का फ्लैट बुक कराया था। आरोप है कि पैसे लेने के बावजूद बिल्डर ने समय पर फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं कराई और लगातार टालमटोल करता रहा।
जमीन की वैधता पर उठे सवाल
शिकायतकर्ता को शक हुआ कि कहीं यह जमीन सीएनटी एक्ट के दायरे में तो नहीं आती या फिर यह गैर आबाद जमीन तो नहीं है। इसी वजह से उन्होंने उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में बिल्डर कंपनी और अन्य संबंधित पक्षों को भी शामिल किया गया है।
फोरम ने मांगी थी स्पष्ट रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान फोरम ने अंचल कार्यालय से जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने को कहा था, ताकि मामले का निपटारा हो सके। लेकिन समय पर रिपोर्ट नहीं मिलने से प्रक्रिया रुक गई और शिकायतकर्ता को भी परेशानी हुई।
लापरवाही पर कड़ा संदेश
फोरम के इस आदेश को प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक सख्त संदेश माना जा रहा है। साफ कहा गया है कि जनता से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पीड़ित को राहत की उम्मीद
फोरम के इस फैसले के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि मामले की सुनवाई तेजी से आगे बढ़ेगी और शिकायतकर्ता को न्याय मिलेगा। यह मामला अब सिर्फ जमीन विवाद नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी बड़ा उदाहरण बन गया है।


