Ranchi : राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में इन दिनों इलाज से ज्यादा वित्तीय प्रबंधन को लेकर चर्चा हो रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024–25 और 2025–26 के दौरान वेतन, गैर-वेतन और राज्य योजना मद में मिले करोड़ों रुपये समय पर खर्च नहीं हो सके। कुल मिलाकर करीब 3.20 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि उपयोग से बाहर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब अस्पताल में दवाओं, उपकरणों की मरम्मत और मरीज सुविधाओं को लेकर लगातार शिकायतें रहती हैं, तब फंड का समय पर उपयोग न होना गंभीर सवाल खड़े करता है।
2024–25: लाखों रुपये लौटाने पड़े
वित्तीय वर्ष 2024–25 में वेतन मद में 3.77 करोड़ रुपये उपलब्ध थे। इनमें से 3.10 करोड़ खर्च किए गए, जबकि 67.85 लाख रुपये शेष रह गए, जिन्हें अगले साल में समायोजित किया गया। गैर-वेतन मद में 3.05 करोड़ रुपये मिले थे। 31 मार्च 2025 तक 1.25 करोड़ खर्च हुए और 24.33 लाख रुपये सरेंडर करने पड़े। राज्य योजना मद में 6 करोड़ रुपये उपलब्ध थे। इसमें से 5.75 करोड़ खर्च हुए, लेकिन 24.21 लाख रुपये फिर भी खर्च नहीं हो सके। यानी कुल मिलाकर 2024–25 में 48.55 लाख रुपये समय पर उपयोग नहीं हो पाए।
2025–26: अब भी 2.74 करोड़ रुपये शेष
वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025–26 में 30 नवंबर तक वेतन मद में 4.18 करोड़ रुपये उपलब्ध थे। इनमें से 2.18 करोड़ खर्च हुए और लगभग 2 करोड़ रुपये अभी भी शेष हैं। गैर-वेतन मद में 1.55 करोड़ रुपये मिले थे। इसमें से 80.41 लाख खर्च हुए, जबकि 74.58 लाख रुपये अब तक उपयोग नहीं हो सके। कुल मिलाकर इस साल अब तक 2.74 करोड़ रुपये खर्च नहीं हुए हैं।
मशीन और भवन पर 140 करोड़ का प्रस्ताव
राज्य योजना के तहत मशीन-उपकरण खरीद और भवन निर्माण योजनाओं पर करीब 140 करोड़ रुपये तक खर्च का प्रस्ताव है। यह राशि राज्य भवन निर्माण निगम के जरिए खर्च की जानी है। लेकिन सवाल यह है कि जब छोटी-छोटी मदों की राशि समय पर खर्च नहीं हो पा रही, तो इतनी बड़ी योजनाओं का क्रियान्वयन कितना समय पर होगा?
837.48 करोड़ की बड़ी योजनाएं स्वीकृत
वर्ष 2025 में रिम्स परिसर के विकास के लिए कुल 837.48 करोड़ रुपये की योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें से 49.34 करोड़ रुपये के काम पूरे हो चुके हैं, जबकि बाकी कार्य प्रगति पर हैं। कैंटीन भवन बनकर तैयार हो चुका है। प्रवेश द्वार एक और दो का निर्माण भी पूरा हो गया है। परिसर को सुरक्षित करने के लिए बाउंड्री वॉल का काम चल रहा है, जिसे डीआईजी ग्राउंड तक पूरा करने की प्रक्रिया जारी है।
प्रमुख परियोजनाएं (राशि करोड़ में)
उठ रहे बड़े सवाल
जब अस्पताल में मरीजों की लंबी कतारें, दवाओं की कमी और मशीनों की खराबी जैसी समस्याएं सामने आती हैं, तब करोड़ों रुपये का समय पर उपयोग न होना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है।
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