Ranchi : रिम्स में साफ-सफाई के टेंडर को लेकर चल रहा विवाद अब अदालत में पहुंच चुका है। इस मामले में हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की बेंच में सुनवाई हुई।
विपक्षी कंपनी ने मांगा समय
सुनवाई के दौरान टेंडर पाने वाली कंपनी की ओर से अदालत से थोड़ा वक्त मांगा गया। उनका कहना था कि केस से जुड़े कुछ जरूरी दस्तावेज रिकॉर्ड पर लाने हैं, इसलिए तैयारी के लिए समय दिया जाए। कोर्ट ने इस पर सहमति जताते हुए मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च तय कर दी है।
दस साल से काम कर रही कंपनी ने उठाए सवाल
यह याचिका मेसर्स अन्नपूर्णा यूटिलिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दाखिल की गई है। कंपनी का कहना है कि वह पिछले करीब दस वर्षों से रिम्स में साफ-सफाई का काम कर रही थी। लेकिन फरवरी में अचानक उनके काम पर रोक लगा दी गई और दूसरी कंपनी को कार्यादेश जारी कर दिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से नहीं हुई और गलत ढंग से दूसरी कंपनी को काम सौंप दिया गया। अब सबकी नजर 23 मार्च की सुनवाई पर टिकी है, जब अदालत में दस्तावेज पेश किए जाएंगे और आगे की स्थिति साफ होगी।
भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस का पलटवार
इधर, सियासी गलियारों में भी बयानबाजी तेज हो गई है।झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता लाल किशोर नाथ शाहदेव ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा बेबुनियाद बातें कर जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है।
‘मासूम बच्चों के नाम पर राजनीति’ का आरोप
शाहदेव ने कहा कि भाजपा अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख अब मासूम बच्चों के नाम पर राजनीति कर रही है और राज्य की छवि खराब करने में लगी है। उन्होंने दावा किया कि हेमंत सोरेन सरकार के कार्यकाल में पुलिस ने ‘ऑपरेशन मुस्कान’ और एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स के जरिए रिकॉर्ड संख्या में बच्चों को रेस्क्यू कर उनके परिवारों से मिलाया है। साथ ही उन्होंने भाजपा को 2014 से 2019 के अपने शासनकाल का रिकॉर्ड देखने की सलाह दी और कहा कि उस दौरान झारखंड मानव तस्करी का केंद्र बन गया था। फिलहाल, रिम्स टेंडर विवाद और उस पर सियासी बयानबाजी- दोनों मुद्दे प्रदेश में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
Also Read : झारखंड विधानसभा का बजट सत्र आज से शुरू, राज्यपाल देंगे अभिभाषण


