Ranchi : झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक हॉफ संजीव कुमार ने सभी वन प्रमंडलों को इको रेस्टोरेशन पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने वन विभाग के प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत बनाने के लिए आज अपने कार्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में एक अहम बैठक की। बैठक में विभाग के 31 ग्रुप के नोडल पदाधिकारी और सहयोगी वन प्रमंडल पदाधिकारी मौजूद रहे। प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने कहा कि अब वन विभाग सिर्फ प्रशासनिक कामों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और इको सिस्टम के सुदृढ़ीकरण पर भी पूरा ध्यान देना होगा।
बैठक में उठाए गए मुख्य मुद्दे
बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई और निर्देश दिए गए। इनमें प्रमुख थे:
- कैंपा योजना और वित्तीय संसाधन: कैंपा योजना के तहत उपलब्ध राशि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना।
- जलवायु परिवर्तन और वन नीति: झारखंड वन नीति 2026 के अनुरूप जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने वाले कदम उठाना।
- संयुक्त वन प्रबंधन और इको डेवलपमेंट समिति: इन समितियों को सक्रिय और मजबूत बनाना।
- ऑनलाइन ट्रांज़िट चालान: खनिज परिवहन को ऑनलाइन ट्रांज़िट चालान के जरिए सुचारू बनाना।
- इको रेस्टोरेशन पॉलिसी में सुधार: वन क्षेत्र की पुनर्स्थापना और संरक्षण की नीति को और प्रभावी बनाना।
- अनुसंधान और प्रशिक्षण: वन विभाग कर्मियों के लिए नवीनतम अनुसंधान और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना।
- वन्य जीव प्रबंधन और एनजीओ सहभागिता: रीजन स्तर पर वन्य जीव संरक्षण में एनजीओ की भूमिका को स्पष्ट करना।
- तकनीकी उपकरण और आधुनिकीकरण: विभाग और कर्मचारियों को आधुनिक तकनीकी उपकरणों से लैस करना।
- मानव-हाथी संघर्ष नियंत्रण: वन्य प्राणी कॉरिडोर की पहचान और संवर्धन, साथ ही मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के उपाय।
- चारागाह और पेट्रोलियम संसाधन: वन क्षेत्र में चारागाह का विकास और पेट्रोलियम संसाधन का बढ़ावा।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी और सुझाव
बैठक में प्रधानमंत्री वन संरक्षक वन्य प्राणी रवि रंजन, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक सिद्धार्थ त्रिपाठी, मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी एसआर नतेश और वन संरक्षक प्रशासन पीआर नायडू भी शामिल हुए। सभी अधिकारियों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए, जिससे विभाग के इको रेस्टोरेशन और वन संरक्षण के कार्यक्रमों में नई दिशा मिलेगी।
आगे की रणनीति
प्रधान मुख्य वन संरक्षक हॉफ संजीव कुमार ने बैठक के अंत में स्पष्ट किया कि अब हर वन प्रमंडल को अपनी जिम्मेदारी के साथ इको रेस्टोरेशन और वन संरक्षण की गतिविधियों में तेजी लानी होगी। उन्हें समयबद्ध रिपोर्टिंग करने, तकनीकी उपकरणों का प्रभावी उपयोग करने और स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
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