Close Menu
Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Johar LIVEJohar LIVE
    • होम
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    • होम
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Home»धर्म/ज्योतिष»पति की लंबी आयु का व्रत वटसावित्री
    धर्म/ज्योतिष

    पति की लंबी आयु का व्रत वटसावित्री

    Team JoharBy Team JoharMay 22, 2020No Comments7 Mins Read0
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link

    Joharlive Team

    सनातन धर्म में पति ही परमेश्वर का दूसरा रूप है। प्रत्येक स्त्री का कामना होता है कि वह सुहागन रहे। स्वयम कोई कष्ट हो पर पति दीर्घायु और स्वाथ हो। इसी कामना का व्रत है वटसावित्री । वट सावित्रि व्रत का महत्व जैसा कि इस व्रत के नाम और कथा से ही ज्ञात होता है कि यह पर्व हर परिस्थिति में अपने जीवनसाथी का साथ देने का संदेश देता है।

    इससे ज्ञात होता है कि पतिव्रता स्त्री में इतनी ताकत होती है कि वह यमराज से भी अपने पति के प्राण वापस ला सकती है। वहीं सास-ससुर की सेवा और पत्नी धर्म की सीख भी इस पर्व से मिलती है। इस दिन सौभाग्यवती स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य और उन्नति और संतान प्राप्ति के लिये यह व्रत रखती हैं।

    प्रसिद्ध ज्योतिष आचार्य प्रणव मिश्रा ने बताया कि ऋषिकेश पञ्चाङ्ग के अनुसार वट सावित्री अमावस्या की पूजा और व्रत इस वर्ष 22 मई को मनाया जाएगा।

    वट सावित्री व्रत समय
    22 मई शुक्रवार को बुधादित्य योग, कृतिका नक्षत्र और शोभन योग में पड़ रहा है, जो ज्योतिषीय गणना के अनुसार उत्तम योग है। ज्येष्ठ अमावस्या तिथि का प्रारंभ 21 मई दिन गुरुवार को रात्रि 09 बजकर 16 मिनट पर हो रहा है, जो 22 मई को रात्रि 10 बजकर 36 मिनट तक रहेगी।

    अमावस्या तिथि प्रारम्भ👉 मई 21, 2020 को रात्रि 09:16 बजे से।

    अमावस्या तिथि समाप्त👉 मई 22, 2020 को रात्रि 10:36बजे तक।

    • पूजा विधि

    पति की लंबी आयु की कामना का व्रत बरगद के वृक्ष के साथ-साथ सत्यवान-सावित्रि और यमराज की पूजा की जाती है। विष्णुपुराण में वर्णन है कि वटवृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देव वास करते हैं। इसके समक्ष बैठकर पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। वट सावित्री व्रत के दिन सुहागिन स्त्रियों को प्रातःकाल उठकर स्नान करना चाहिये इसके बाद रेत से भरी एक बांस की टोकरी लें और उसमें ब्रहमदेव की मूर्ति के साथ सावित्री की मूर्ति स्थापित करें।

    इसी प्रकार दूसरी टोकरी में सत्यवान और सावित्री की मूर्तियाँ स्थापित करें दोनों टोकरियों को वट के वृक्ष के नीचे रखे और ब्रहमदेव और सावित्री की मूर्तियों की पूजा करें। तत्पश्चात सत्यवान और सावित्री की मूर्तियों की पूजा करे और वट वृक्ष को जल दे वट-वृक्ष की पूजा हेतु जल, फूल, रोली-मौली, कच्चा सूत, भीगा चना, गुड़ इत्यादि चढ़ाएं और जलाभिषेक करे।

    इसके बाद निम्न श्लोक से वटवृक्ष की प्रार्थना करें

    यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले।
    तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मा सदा॥

    पूजा में जल, मौली, रोली, कच्चा सूत, भिगोया हुआ चना, फूल तथा धूप का प्रयोग करें।

    जल से वटवृक्ष को सींचकर उसके तने के चारों ओर कच्चा धागा लपेटकर तीन बार अथवा यथा शक्ति 9,11,27,54, या 108 बार परिक्रमा करें। बड़ के पत्तों के गहने पहनकर वट सावित्री की कथा सुनें। फिर बाँस के पंखे से सत्यवान-सावित्री को हवा करें। बरगद के पत्ते को अपने बालों में लगायें। भीगे हुए चनों का बायना निकालकर, नकद रुपए रखकर सासुजी के चरण-स्पर्श करें। यदि सास वहां न हो तो बायना बनाकर उन तक पहुंचाएं।

    वट तथा सावित्री की पूजा के पश्चात प्रतिदिन पान, सिन्दूर तथा कुंमकुंम से सौभाग्यवती स्त्री के पूजन का भी विधान है। यही सौभाग्य पिटारी के नाम से जानी जाती है। सौभाग्यवती स्त्रियों का भी पूजन होता है। कुछ महिलाएं केवल अमावस्या को एक दिन का ही व्रत रखती हैं अपनी सामर्थ्य के हिसाब से पूजा समाप्ति पर ब्राह्मणों को वस्त्र तथा फल आदि वस्तुएं बांस के पात्र में रखकर दान करें। घर में आकर पूजा वाले पंखें से अपने पति को हवा करें तथा उनका आशीर्वाद लें।

    आज के दिन व्रती श्रृंगार सामग्री और दान सामग्री लेकर ब्राह्मण हो दे औऱ निम्न मंत्र से संकल्प करें:-

    मम वैधव्यादिसकलदोषपरिहारार्थं ब्रह्मसावित्रीप्रीत्यर्थं
    सत्यवत्सावित्रीप्रीत्यर्थं च वटसावित्रीव्रतमहं करिष्ये।

    स्वास्थ के अनुसार या अपने कुलाचार के अनुसार व्रत का पालन करें

    • वट सावित्रि व्रत की कथा

    यह महान और पावन व्रत एक पतिव्रता नारी और उनके पति की कहानी है। जो अपने पतिव्रत धर्म के बल से जमराज से भी अपने पति को जीवित बचा लेती है। यह कथा सत्यवान सावित्रि के नाम से विशेष रूप से प्रचलित हैं। एक समय की बात है कि मद्रदेश में अश्वपति नाम के धर्मात्मा राजा का राज था। उनकी कोई भी संतान नहीं थी। राजा ने संतान हेतु यज्ञ करवाया। कुछ समय बाद उन्हें एक कन्या की प्राप्ति हुई जिसका नाम उन्होंने सावित्री रखा।

    विवाह योग्य होने पर सावित्री के लिए द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान को पतिरूप में वरण किया। सत्यवान वैसे तो राजा का पुत्र था लेकिन उनका राज-पाट छिन गया था और अब वह बहुत ही द्ररिद्रता का जीवन जी रहे थे। उसके माता-पिता की भी आंखो की रोशनी चली गई थी। सत्यवान जंगल से लकड़ियां काटकर लाता और उन्हें बेचकर जैसे-तैसे अपना गुजारा कर रहा था। जब सावित्रि और सत्यवान के विवाह की बात चली तो नारद मुनि ने सावित्रि के पिता राजा अश्वपति को बताया कि सत्यवान अल्पायु हैं और विवाह के एक वर्ष बाद ही उनकी मृत्यु हो जाएगी।

    हालांकि राजा अश्वपति सत्यवान की गरीबी को देखकर पहले ही चिंतित थे और सावित्रि को समझाने की कोशिश में लगे थे। नारद की बात ने उन्हें और चिंता में डाल दिया लेकिन सावित्रि ने एक न सुनी और अपने निर्णय पर अडिग रही। अंततः सावित्री और सत्यवान का विवाह हो गया। सावित्री सास-ससुर और पति की सेवा में लगी रही। नारद मुनि ने सत्यवान की मृत्यु का जो दिन बताया था, उसी दिन सावित्री भी सत्यवान के साथ वन को चली गई। वन में सत्यवान लकड़ी काटने के लिए जैसे ही पेड़ पर चढ़ने लगा, उसके सिर में असहनीय पीड़ा होने लगी और वह सावित्री की गोद में सिर रखकर लेट गया। कुछ देर बाद उनके समक्ष अनेक दूतों के साथ स्वयं यमराज खड़े हुए थे। जब यमराज सत्यवान के जीवात्मा को लेकर दक्षिण दिशा की ओर चलने लगे, पतिव्रता सावित्री भी उनके पीछे चलने लगी।

    आगे जाकर यमराज ने सावित्री से कहा, ‘हे पतिव्रता नारी! जहां तक मनुष्य साथ दे सकता है, तुमने अपने पति का साथ दे दिया। अब तुम लौट जाओ’ इस पर सावित्री ने कहा, ‘जहां तक मेरे पति जाएंगे, वहां तक मुझे जाना चाहिए। यही सनातन सत्य है’ यमराज सावित्री की वाणी सुनकर प्रसन्न हुए और उसे वर मांगने को कहा। सावित्री ने कहा, ‘मेरे सास-ससुर अंधे हैं, उन्हें नेत्र-ज्योति दें’ यमराज ने ‘तथास्तु’ कहकर उसे लौट जाने को कहा और आगे बढ़ने लगे किंतु सावित्री यम के पीछे ही चलती रही यमराज ने प्रसन्न होकर पुन: वर मांगने को कहा।

    सावित्री ने वर मांगा, ‘मेरे ससुर का खोया हुआ राज्य उन्हें वापस मिल जाए’ यमराज ने ‘तथास्तु’ कहकर पुनः उसे लौट जाने को कहा, परंतु सावित्री अपनी बात पर अटल रही और वापस नहीं गयी। सावित्री की पति भक्ति देखकर यमराज पिघल गए और उन्होंने सावित्री से एक और वर मांगने के लिए कहा तब सावित्री ने वर मांगा, ‘मैं सत्यवान के सौ पुत्रों की मां बनना चाहती हूं।

    कृपा कर आप मुझे यह वरदान दें’ सावित्री की पति-भक्ति से प्रसन्न हो इस अंतिम वरदान को देते हुए यमराज ने सत्यवान की जीवात्मा को पाश से मुक्त कर दिया और अदृश्य हो गए। सावित्री जब उसी वट वृक्ष के पास आई तो उसने पाया कि वट वृक्ष के नीचे पड़े सत्यवान के मृत शरीर में जीव का संचार हो रहा है। कुछ देर में सत्यवान उठकर बैठ गया। उधर सत्यवान के माता-पिता की आंखें भी ठीक हो गईं और उनका खोया हुआ राज्य भी वापस मिल गया।

    आचार्य प्रणव मिश्रा
    आचार्यकुलम, अरगोड़ा राँची
    9031249195

    Dharmik news Latest news Online news Vatsavitri
    Follow on Facebook Follow on X (Twitter) Follow on Instagram Follow on YouTube Follow on WhatsApp Follow on Telegram
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Previous Articleझारखंड में मिला देर रात 5 और कोरोना पॉजिटिव मरीज, सभी मरीज बोकारो से, राज्य में आंकड़ा बढ़कर हुआ 308
    Next Article आज 22 मई का राशिफल: जानिए क्या कहते हैं आपके सितारे

    Related Posts

    जोहार ब्रेकिंग

    टाइगर हिल से तिरंगे तक: कारगिल युद्ध की वो कहानी, जिसे हर भारतीय को जानना चाहिए

    July 26, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    झारखंड: स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई ताकत, 720 नई एंबुलेंस खरीदेगी सरकार

    July 24, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    आज का दिन भारतीय बैंक के इतिहास में अहम मोड़ साबित क्यों हुआ?

    July 19, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    श्रावणी मेला 2026: सुरक्षा का मास्टर प्लान तैयार, भीड़, आतंक और अपराध… हर मोर्चे पर रहेगी नजर

    July 17, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    ‘जय-जय जगन्नाथ’ के जयकारों से गूंजा रांची, सीएम हेमन्त सोरेन ने खींची रथ की रस्सी

    July 16, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    क्या अयोध्या के बाद अब बद्रीनाथ धाम में भी हो रही चढ़ावा चोरी?

    July 4, 2026
    Latest Posts

    झारखंड : हेमंत सोरेन के बड़े निर्देश, 24 घंटे बिजली, 200 यूनिट मुफ्त और रांची में तीन स्मार्ट ग्रिड

    July 29, 2026

    झारखंड: जेपीएससी परीक्षा अनियमितता मामला, चार आरोपियों की रिमांड दो दिन और बढ़ी

    July 29, 2026

    E20 का गणित: एथनॉल से नुकसान किसे… जनता, सरकार या दोनों?

    July 29, 2026

    झारखंड: शिल्पी नेहा तिर्की ने दिए निर्देश, तीन शहरों में खुलेंगे आधुनिक मिलेट कैफे

    July 29, 2026

    झारखंड: 160 करोड़ पर ED का शिकंजा, अवैध कोयला सिंडिकेट के 31 ठिकानों पर बड़ी रेड

    July 29, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    © 2026 Johar LIVE. | About Us | AdSense Policy | Privacy Policy | Terms and Conditions | Contact Us

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.