झारखंड में 14वीं JPSC को लेकर बवाल मचा हुआ. लोग कई दिनों से रांची के जयपाल सिंह मुडा स्टेडियम में लोग धरने पर कई मांगों को लेकर प्रोटेस्ट कर रहे हैं. प्रोटेस्ट करने वाले लोगों की मांगों में मुख्य मांग CBI जांच की है. लेकिन इसी मांग के बीच JPSC की दूसरी सिविल सेवा परीक्षा का पुराना मामला भी सवाल खड़ा करता है. दूसरी JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच हाईकोर्ट के आदेश पर CBI को सौंपी गई थी. 14 वर्षों की जांच के बाद चार्जशीट दाखिल हुई, लेकिन मामला अभी तक अंतिम न्यायिक निष्कर्ष तक नहीं पहुंचा है.
सवाल यह है कि अगर 14वीं JPSC की जांच भी CBI को सौंप दी जाती है, तो क्या वह समयबद्ध तरीके से पूरी होगी? या फिर दूसरी JPSC की तरह यह मामला भी वर्षों तक जांच और अदालत के बीच उलझा रहेगा?
14वीं JPSC के मामले में अभी राज्य CID जांच कर रही है. करीब 1,000 सफल अभ्यर्थियों से OMR शीट की प्रतियां लेकर मूल OMR से मिलान किया जा रहा है. मामले में कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं. इसके अलावा JPSC अध्यक्ष का इस्तीफा, परीक्षा टल गई है, मेंस रद्द हुआ है. जिसका OMR लीक हुआ उसकी गिरफ्तारी हुई है. ऐसे में CBI जांच की मांग का एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या मौजूदा CID जांच पर भरोसा नहीं है, या जांच को किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की जरूरत इसलिए महसूस की जा रही है क्योंकि जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं?
दूसरी JPSC का सवाल यहां क्यों महत्वपूर्ण है?
दूसरी JPSC की कहानी अलग नहीं है, वहां भी परीक्षा की चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे. मामला हाईकोर्ट पहुंचा. CBI जांच हुई. जांच लंबी चली. बाद में चार्जशीट दाखिल हुई और अदालत में प्रक्रिया आगे बढ़ी. लेकिन इतने वर्षों के बाद भी अंतिम फैसला नहीं आया.
दरअसल, साल 2005 में हुई दूसरी JPSC परीक्षा के चयन प्रक्रिया पर सवाल उठे. इस परीक्षा के जरिए डिप्टी कलेक्टर, DSP, सेल्स कलेक्टर समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां की जानी थी. जांच में कथित अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद मामला न्यायिक जांच के दायरे में पहुंचा. झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाओं में परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए गए.
CBI ने वर्ष 2012 में केस दर्ज किया, लेकिन चार्जशीट दाखिल करने में करीब 12 साल लग गए. 2024 में CBI ने 50 से अधिक लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. इसमें परीक्षा के मूल्यांकन और अंकों में कथित अनियमितता को आधार बनाया गया.
इसके बाद CBI ने 15 अक्टूबर 2024 को चार्जशीट दाखिल की थी और अदालत ने 7 मार्च 2025 को संज्ञान लेते हुए आरोपियों को समन जारी किया. अप्रैल 2025 में पूर्व JPSC अध्यक्ष समेत 13 आरोपी विशेष CBI अदालत में पेश हुए. इसके बाद 2026 तक यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है, अंतिम दोषसिद्धि या बरी होने का निष्कर्ष सामने नहीं आया है.
यानि 14 साल बाद भी दूसरे JPSC के CBI जांच का कुछ नहीं हुआ. फिर सवाल बनता है कि 14वीं JPSC के छात्र CBI जांच पर क्यों अड़े हैं?
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