रांची: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन राज्य में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सहायक आचार्य नियुक्ति, JSSC CGL,उत्पाद सिपाही, PGT तथा 11वीं, 13वीं और 14वीं JPSC परीक्षाओं में गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए सभी विवादित परीक्षाओं को रद्द करने और पूरे मामले की अदालत की निगरानी में CBI जांच कराने की मांग की.
CBI के अलावा कोई रास्ता नहीं
मरांडी ने कहा कि राज्य में हाल के दिनों में जितनी भी परीक्षाएं हुई हैं, उनमें अनियमितताएं सामने आई हैं. उन्होंने कहा कि इन कथित गड़बड़ियों के कारण युवा सड़क पर आंदोलन करने को मजबूर हैं. उनका कहना था कि सरकार को सभी विवादित परीक्षाएं रद्द कर पूरे मामले की न्यायिक निगरानी में CBI से जांच करानी चाहिए. उन्होंने कहा कि “दूसरा कोई रास्ता नहीं है और इस मामले में कोई समझौता नहीं होना चाहिए.”
सरकार जवाब देने के लिए तैयार
इस दौरान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि विपक्ष सरकार पर जो भी आरोप लगाना चाहता है, वह चर्चा के दौरान रखे. सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष को बीच में सदन की कार्यवाही बाधित करने का अधिकार नहीं है.
विपक्ष को CID से डर क्यों? पहली और दूसरी JPSC की बात क्यों नहीं
वहीं विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि छात्रों का आंदोलन और उनकी मांगें गंभीर हैं तथा सरकार उन्हें गंभीरता से ले रही है. उन्होंने कहा कि सरकार की तत्परता के कारण CID जांच में अब तक करीब दो दर्जन लोगों को जेल भेजा जा चुका है. उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि उसे CID जांच से किस बात का डर है. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि CBI की विश्वसनीयता समाप्त हो चुकी है और वह राजनीतिक एजेंसी बन गई है. उन्होंने कहा कि छात्रों से संवाद कर समाधान निकाला जा सकता है और केवल 12वीं, 13वीं या 14वीं JPSC ही नहीं, बल्कि पहले के मामलों पर भी चर्चा होनी चाहिए.
सत्ता पक्ष के विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने भी नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें यह बताना चाहिए कि पहली और दूसरी JPSC का परिणाम क्या रहा और उस समय उनके रिश्तेदारों को नौकरी कैसे मिली.
परीक्षा अनियमितताओं और जांच एजेंसी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के कारण सदन का माहौल काफी गर्म रहा. यह मुद्दा मानसून सत्र के प्रमुख राजनीतिक विषयों में से एक बनकर उभरा.




