Chaibasa : चाईबासा जिले में नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन ने एक अहम कदम उठाया है। शुक्रवार को समाहरणालय परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में डीसी चंदन कुमार और एसपी अमित रेणु ने दो पीड़ित परिवारों के आश्रितों को अनुकम्पा के आधार पर निम्नवर्गीय लिपिक (एलडीसी) पद पर नियुक्ति पत्र सौंपा। इस पहल का मकसद उन परिवारों को स्थायी सहारा देना है, जिन्होंने नक्सली घटनाओं में अपने परिजनों को खो दिया है। लंबे समय से आर्थिक और सामाजिक संकट झेल रहे इन परिवारों के लिए यह नियुक्ति नई उम्मीद लेकर आई है। प्रशासन का मानना है कि नौकरी मिलने से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि वे सम्मान के साथ समाज की मुख्यधारा में लौट सकेंगे।
इन आश्रितों को मिली नौकरी
नियुक्ति पाने वालों में एसरन सोय शामिल हैं, जिनके पति सादो बारजो की 12 जनवरी 2018 को गुदड़ी थाना क्षेत्र में नक्सलियों ने हत्या कर दी थी। वहीं विकास बुढ़ को भी एलडीसी पद पर नियुक्ति दी गई है। उनके पिता नमन बुढ़ की 27 मार्च 2020 को आनंदपुर थाना क्षेत्र में उग्रवादियों ने हत्या कर दी थी। इन घटनाओं के बाद दोनों परिवारों की आजीविका पर गहरा असर पड़ा था।
प्रक्रिया पूरी होने के बाद मिला नियुक्ति पत्र
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इन नियुक्तियों का फैसला जिला स्तरीय अनुकम्पा समिति की बैठकों में लिया गया था, जो 26 सितंबर 2025 और 20 मार्च 2026 को आयोजित हुई थीं। सभी जरूरी जांच और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पात्र आश्रितों को यह नियुक्ति दी गई।
पुनर्वास पर प्रशासन का फोकस
इस मौके पर डीसी ने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य सिर्फ तत्काल मदद देना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों का स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास के लिए लगातार काम कर रही है। वहीं, एसपी ने बताया कि उग्रवाद के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ पीड़ित परिवारों को सहयोग देना भी प्राथमिकता में है। प्रशासन और पुलिस मिलकर यह कोशिश कर रहे हैं कि ऐसे परिवारों को सुरक्षित माहौल और बेहतर जीवन का मौका मिल सके।
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