जोहरलाइव ब्यूरो
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ममता बनर्जी की अगुवाई वाली ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) को इंडियन बैंक के चार फ्रीज खातों को संचालित करने की मांग पर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया. जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार किया, जिसमें हाई कोर्ट ने इन खातों को चलाने की अनुमति देने से मना कर दिया था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से मुख्य मामले की सुनवाई में तेजी लाने का अनुरोध किया.
ये पूरा मामला पश्चिम बंगाल के विधायक विश्वनाथ दास की 18 जून 2026 को दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है. शिकायत के आधार पर बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस ने FIR दर्ज की थी. आरोप लगाया गया कि अवैध गतिविधियों, प्रभाव के दुरुपयोग और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुटाए गए पैसे को पार्टी के बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर किया गया.
जांच के दौरान इंडियन बैंक की हरीश मुखर्जी रोड शाखा में मौजूद AITC के चार खातों पर डेबिट-फ्रीज लगाया गया. इसके बाद पार्टी ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख करते हुए खातों को संचालित करने की अनुमति मांगी थी.
27 अगस्त 2026 को हाई कोर्ट ने चारों खातों को चलाने के लिए अतिरिक्त अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि पार्टी के रोजमर्रा और मासिक खर्चों के लिए पहले ही एक अलग व्यवस्था मौजूद है और मुख्य याचिका पर मेरिट के आधार पर सुनवाई होनी बाकी है.
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट में AITC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि चार खातों के फ्रीज होने से पार्टी के कामकाज पर गंभीर असर पड़ रहा है. उन्होंने पार्टी के ऑडिटेड खातों का हवाला देते हुए कहा कि राजनीतिक खर्चों को छोड़कर रोजमर्रा के संचालन पर करीब ₹12.15 करोड़ प्रति माह खर्च होता है.

सिंघवी ने दलील दी कि अगर किसी राज्य की पुलिस पार्टी के बैंक खाते फ्रीज कर देती है तो इससे राजनीतिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा इंडियन बैंक खातों का मामला पहले फ्रीज किए गए तीन HDFC बैंक खातों से अलग है. पार्टी की ओर से कोर्ट द्वारा नियुक्त एडमिनिस्ट्रेटर या किसी अंतरिम व्यवस्था के जरिए खातों के संचालन का विकल्प भी रखा गया.
राज्य ने क्या दलील दी?
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध किया. उन्होंने कहा कि मामला अलग FIR और AITC के भीतर चल रहे गुटीय विवाद से जुड़ा है.
राज्य की ओर से यह भी कहा गया कि जांच में कथित तौर पर बड़ी रकम के नकद जमा और सरकारी जमीन को निजी जमीन में बदलने के बाद उससे जुड़े लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है. सिंघवी ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि इन मुद्दों का मौजूदा बैंक खातों के मामले से सीधा संबंध नहीं है.
चुनाव आयोग के आदेश का भी जिक्र
सुनवाई के दौरान 17 सितंबर 2026 के चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश का भी जिक्र हुआ. आयोग ने AITC के भीतर दो गुटों के विवाद के बीच अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों पक्षों को पार्टी का नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और उसका ‘Flowers & Grass’ चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है. इसी वजह से खातों पर अधिकार का बड़ा सवाल भी फिलहाल लंबित है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को इस गुटीय विवाद पर तीन महीने के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया था.
पहले HDFC के तीन खातों पर भी लगी थी रोक
यह मामला AITC के पहले से फ्रीज तीन HDFC बैंक खातों से अलग है. उन खातों को ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में फ्रीज किया गया था. 9 जुलाई को कलकत्ता हाई कोर्ट ने कोर्ट द्वारा नियुक्त स्पेशल ऑफिसर की निगरानी में पार्टी को रोजमर्रा और मासिक खर्चों के लिए उन खातों से धन इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी.
11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उस अंतरिम व्यवस्था में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था और कहा था कि इससे पार्टी के रोजमर्रा के कामकाज पर पूरी तरह रोक नहीं लग रही है.
अब इंडियन बैंक के चार खातों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मेरिट पर कोई फैसला दिए बिना हस्तक्षेप से इनकार किया है. कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट से लंबित मुख्य मामले की सुनवाई जल्द करने का अनुरोध किया है.
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