Ranchi : ओरमांझी थाना क्षेत्र के चर्चित बीजेपी नेता जीतराम मुंडा हत्याकांड में साढ़े तीन साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। साक्ष्य के अभाव में अपर न्यायायुक्त आनंद प्रकाश की अदालत ने मामले में नामजद सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। इस फैसले के साथ ही लंबे समय से चली आ रही न्यायिक प्रक्रिया का अंत हो गया।
सबूतों का अभाव
मामले में बचाव पक्ष के अधिवक्ता सुजय दयाल ने बताया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ठोस और निर्णायक साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा। अभियोजन की ओर से कुल नौ गवाहों को अदालत में पेश किया गया, लेकिन कोई भी गवाह आरोप साबित करने में सक्षम नहीं रहा। इसी आधार पर अदालत ने सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया।
इन आरोपियों को किया गया बरी
अदालत से बरी किए गए आरोपियों में मनोज मुंडा, डब्लू यादव, कार्तिक मुंडा, रतन बेदिया, बलराम साहू, अमन सिंह और राजीव सिंह शामिल हैं।
हत्या के बाद बना था एसआईटी
गौरतलब है कि 22 मार्च 2021 को ओरमांझी थाना क्षेत्र स्थित आर्यन ढाबा में चाय पीने के दौरान अज्ञात अपराधियों ने भाजपा नेता जीतराम मुंडा की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस वारदात से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी और राजनीतिक हलकों में भी भारी आक्रोश देखने को मिला था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था।
मुख्य आरोपी पर था इनाम
जांच के दौरान पुलिस ने मनोज मुंडा को मुख्य आरोपी मानते हुए उस पर एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया था। हालांकि, लंबी जांच और सुनवाई के बावजूद आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त और मजबूत साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
अदालत के इस फैसले के बाद जहां आरोपियों के परिजनों ने राहत की सांस ली है, वहीं जीतराम मुंडा के समर्थकों और परिजनों में निराशा देखी जा रही है। यह फैसला एक बार फिर से प्रभावी जांच और मजबूत साक्ष्य की आवश्यकता पर सवाल खड़े करता है।

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