Ranchi : देश के साफ-सुथरे शहरों में शामिल इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों के बाद अब राजधानी रांची में भी इसी तरह के खतरे की आशंका जताई जा रही है। रांची के कई इलाकों में नालियों से होकर गुजर रही जर्जर और फटी पाइपलाइन के कारण लोगों तक दूषित पानी पहुंच रहा है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
शहर की चिन्हित 312 मलिन बस्तियों में खराब पाइपों के जरिए जलापूर्ति हो रही है। कई घनी आबादी वाले इलाकों में अभी तक पूरी पाइपलाइन नहीं बिछी है। ऐसे में राइजिंग मेन से एक इंच के पतले पाइप को नालियों के रास्ते घरों तक पहुंचाया गया है। इससे नालियों में मौजूद बैक्टीरिया और हानिकारक तत्व सीधे नलों के जरिए घरों में पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह का दूषित पानी उल्टी, दस्त और निर्जलीकरण जैसी बीमारियों का बड़ा कारण बन सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार पीने के पानी की गुणवत्ता तय सीमा में होनी चाहिए, लेकिन कई इलाकों में यह मानक पूरा नहीं हो पा रहा है।
पाइपलाइन में लीकेज की समस्या को लेकर पीएचईडी, नगर निगम और आम लोगों की लापरवाही भी सामने आ रही है। कई जगहों पर पाइपलाइन में रिसाव होने से पानी सप्लाई बंद होने पर नालियों की गंदगी, भारी धातुएं और धूल-मिट्टी पाइप में चली जाती है, जिससे पानी और अधिक दूषित हो जाता है। रातू रोड, किशोरगंज, पुरानी रांची, थड़पखना, कोकर, शांतिनगर, गड़हा टोली, मौलाना आजाद कॉलोनी, चुटिया, हिंदपीढ़ी, अरगोड़ा के निचले इलाके समेत कई मोहल्लों और नई कॉलोनियों में यह समस्या ज्यादा देखी जा रही है।
रुक्का जलशोधन केंद्र के कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर ने मीडिया को बताया कि पीएचईडी द्वारा पानी की जांच के बाद ही उसे टंकियों तक भेजा जाता है। साथ ही, संबंधित क्षेत्रों में लाइनमैन द्वारा पाइपलाइन और राइजिंग मेन की जांच भी की जाती है। बावजूद इसके, शहर में पाइपलाइन की स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है।
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