झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आजसू प्रमुख सुदेश महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य की शासन व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने पूछा कि क्या मुख्यमंत्री अप्रासंगिक हो गए हैं? क्या शासन पर उनकी पकड़ कमजोर हो गई है और लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं ध्वस्त हो रही हैं?
सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सुदेश महतो ने कहा कि हाल की घटनाओं से लोगों के मन में सरकार के राजनीतिक नेतृत्व और कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या मुख्यमंत्री द्वारा की गई कथित शासकीय गलतियों और फैसलों को लेकर कुछ वर्तमान एवं पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह उन्हें ब्लैकमेल कर रहे हैं.
उल्लेखनीय है, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने मुख्यमंत्री से मिलने के लिए समय मांगा था, समय नहीं मिलने पर बीते 2 सितंबर को भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव से मुलाकात कर जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में गड़बड़ी की सीबीआई जांच और छात्रों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की थी.
कांग्रेस-झामुमो प्रतिनिधिमंडल से भी असहज क्यों
आजसू प्रमुख ने कहा कि मुख्यमंत्री से मिलने में विपक्ष ही नहीं, बल्कि सरकार में शामिल कांग्रेस और झामुमो के प्रतिनिधिमंडलों को भी परेशानी हो रही है. उन्होंने सवाल किया कि आखिर मुख्यमंत्री अपने राजनीतिक सहयोगियों और विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों से मिलने में असहज क्यों हैं?
सुदेश महतो ने जेपीएससी-जेएसएससी गड़बड़ी मामले में सीआईडी से भी जवाब मांगा. उन्होंने कहा कि जिन मांगों को लेकर मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा गया, उसी मुख्य सचिव के गोपनीय कार्यालय से जुड़े एक सरकारी कर्मी को सीआईडी ने गिरफ्तार किया है. उन्होंने पूछा कि गिरफ्तार कर्मी ने जांच के दौरान क्या-क्या खुलासे किए हैं और इसकी जानकारी जनता को क्यों नहीं दी जा रही.
सुदेश महतो ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष तक को मुख्यमंत्री से मिलने का समय नहीं मिलना और उन्हें मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपने के लिए मजबूर होना राज्य की शासन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है. उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम से जनता, राजनीतिक विश्लेषक और शासन व्यवस्था के जानकार हैरान हैं.
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