RSS प्रमुख मोहन भागवत का न्यूयॉर्क में दिया भाषण अब भारत की राजनीति में बहस का विषय बन गया है. 29 अगस्त की रात मैडिसन स्क्वायर गार्डन के पास इन्फोसिस थिएटर में हुए “यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन” कार्यक्रम में भागवत ने भारत की एकता और विविधता पर बात की थी. इसके अगले ही दिन कांग्रेस सांसद कपिल सिब्बल ने इस पर तीखा सवाल उठाया.
भागवत ने क्या कहा?
अपने करीब 42 मिनट के भाषण में भागवत ने कहा कि भारत के लिए एकता और विविधता कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह देश के स्वभाव में ही शामिल है. उन्होंने अमेरिका की विविधता की तुलना भारत की “अनेकता में एकता” से की और कहा कि विविधता से एकता कमजोर नहीं होती, बल्कि और खूबसूरत बनती है. भागवत ने यह भी कहा कि अगर कोई सोचता है कि भारत में मुसलमानों की जगह नहीं होनी चाहिए, तो यह सोच हिंदुत्व की भावना के ही खिलाफ है, क्योंकि हिंदुत्व हर इंसान की इज्जत करना सिखाता है. इस कार्यक्रम में करीब 5,000 भारतीय-अमेरिकी और 30 देशों से आए 180 धार्मिक नेता मौजूद थे. इसका आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) ने किया था.
सिब्बल का पलटवार
भागवत के भाषण के अगले दिन ही राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया पर तीखा जवाब दिया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह सुनकर लगा जैसे यह राहुल गांधी का भाषण हो, RSS प्रमुख का नहीं. सिब्बल का कहना था कि विदेश में जाकर विविधता की बात करना आसान है, लेकिन क्या यही भावना भारत में असल जिंदगी में भी दिखती है. उन्होंने मॉब लिंचिंग और जंतर-मंतर जैसी घटनाओं का उदाहरण देते हुए पूछा कि क्या संघ प्रमुख ने कभी ऐसे मामलों पर सरकार से सवाल पूछा. उनका कहना था कि सिर्फ अच्छी बातें कहने से काम नहीं चलेगा, असल में काम करके भी दिखाना होगा.
अब राजनीति गरमाई
भागवत के इस भाषण के बाद भारत में राजनीतिक बहस तेज हो गई है. भाजपा के कई नेता इसे भारत की समावेशी (सबको साथ लेकर चलने वाली) छवि दिखाने वाला अच्छा कदम बता रहे हैं. वहीं कांग्रेस और बाकी विपक्षी दल इसे “दोहरा रवैया” बता रहे हैं. ओवैसी जैसे नेताओं ने भी यही सवाल उठाया कि विदेश में जो विविधता स्वीकार होती दिखती है, वह भारत में व्यवहार में क्यों नहीं दिखती. कुल मिलाकर यह पूरा मामला एक बड़ी वैचारिक लड़ाई बन गया है. एक तरफ RSS अपनी दुनिया भर में छवि सुधारने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे घरेलू राजनीति और जमीनी हकीकत से जोड़कर घेरने की कोशिश कर रहा है.
Also Read:परिसीमन पर आर-पार की लड़ाई! मोरहाबादी में लाखों का सैलाब, सोरेन की गैरमौजूदगी पर सवाल


