रांची के मोरहाबादी मैदान में रविवार को परिसीमन के विरोध में आदिवासी एकता महाजुटान रैली आयोजित हुई. पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में झारखंड के अलग-अलग जिलों से करीब एक लाख आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए. रैली में सीटों के परिसीमन, खान-खनिज संशोधन बिल और सरना धर्म कोड जैसे मुद्दों पर पांच बड़े प्रस्ताव पारित किए गए, जबकि मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए और उन्होंने अपनी जगह जेएमएम विधायक विकास मुंडा को भेजा.
बूटी मोड़ पर रोका गया, फिर भी नौ किलोमीटर पैदल चले लोग
रैली की तस्वीर सुबह से ही बदलने लगी थी. खूंटी की तरफ से आ रही गाड़ियों को बूटी मोड़ पर रोक दिया गया, लेकिन इससे लोगों का हौसला कम नहीं हुआ. महिला-पुरुष बूटी मोड़ से करीब नौ किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर मोरहाबादी पहुंचे. इटकी, बेड़ो, गुमला और सिमडेगा की तरफ से आने वाले लोग इटकी रोड और रातू रोड पर रैली की शक्ल में नजर आए, वहीं बिरसा चौक से भी लगातार भीड़ मोरहाबादी की तरफ बढ़ती रही. झारखंड के अलग-अलग जिलों से सुबह से ही रांची पहुंचने का सिलसिला जारी रहा. दिहाड़ी छोड़कर पहुंचे मजदूर हों या चंदा इकट्ठा कर रांची पहुंचीं बुजुर्ग महिलाएं, मैदान में महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे तक शामिल हुए. पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में आयोजित इस महाजुटान में करीब एक लाख आदिवासी समाज के लोगों के पहुंचने का दावा किया गया, कुछ रिपोर्टों में ये आंकड़ा पांच लाख तक बताया गया.
मुख्य अतिथि बुलाया, पर सोरेन खुद नहीं आए
रैली से पहले आयोजकों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री आवास पहुंचा था और हेमंत सोरेन को महाजुटान में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का न्योता दिया गया था. इस मुलाकात में प्रतिनिधिमंडल की तरफ से शशि पन्ना, अजय तिर्की, रमा खलखो, अनिल पन्ना, ज्योत्सना केरकेट्टा, शिवा कच्छप, अनिल उरांव और पुष्कर बड़ाईक मौजूद थे।. लेकिन रविवार को जब मैदान भीड़ से पट गया, मुख्यमंत्री खुद नहीं पहुंचे. उन्होंने अपनी जगह जेएमएम विधायक विकास मुंडा को भेजा. सरकार और आंदोलन के बीच इस दूरी को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं.
बंधु तिर्की की हुंकार – ‘यह सीटों की नहीं, अधिकारों की लड़ाई’
मंच से सबसे तीखा तेवर पूर्व मंत्री बंधु तिर्की का दिखा. उन्होंने कहा कि परिसीमन में जनसंख्या के आधार पर अगर आदिवासी सीटें घटीं, तो ईंट से ईंट बजा दी जाएगी, और खान एवं खनिज संशोधन विधेयक 2026 को वापस लेना ही होगा. उन्होंने साफ किया कि ये लड़ाई सिर्फ लोकसभा-विधानसभा की सीटें बचाने की नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के संवैधानिक और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है. उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड की पहचान और सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करने की कोशिश हो रही है.
आदिवासी नेत्री ज्योत्सना केरकेट्टा का केंद्र पर तीखा हमला
मंच से आदिवासी नेत्री ज्योत्सना केरकेट्टा ने भी प्रस्तावित परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला. उन्होंने कहा कि अगर परिसीमन सिर्फ जनसंख्या के आधार पर किया गया, तो झारखंड में आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर हो जाएगा, और इसका असर आने वाले समय में राज्य के राजनीतिक नेतृत्व पर भी पड़ेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि रांची से शुरू हुआ ये विरोध अब झारखंड के बाकी जिलों तक भी ले जाया जाएगा.
के. राजू – ‘राहुल गांधी को भेजा आदिवासी समाज की चिंता का संदेश’
झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने भी मंच से केंद्र सरकार और भाजपा पर सीधा निशाना साधा और आदिवासी समाज से एकजुट होकर संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने का आह्वान किया. उन्होंने बताया कि रैली से पहले उनकी राहुल गांधी से बातचीत हुई थी, जिसमें उन्होंने परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज की चिंता का संदेश पहुंचाया. के. राजू ने ये भी कहा कि राहुल गांधी आदिवासी अधिकारों की लड़ाई में लगातार साथ रहे हैं और इससे पहले ओडिशा में आदिवासियों के धार्मिक स्थल की रक्षा के आंदोलन में भी शामिल हो चुके हैं.
मंच पर मौजूद रहे झारखंड की सियासत के कई बड़े चेहरे
महाजुटान के मंच पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, पूर्व सांसद रामेश्वर उरांव, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, सुबोध कांत सहाय, सुखदेव भगत, विधायक राजेश कच्छप, नमन विक्सल कोंगाड़ी और ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस के पदाधिकारी मौजूद रहे. इनके अलावा दयामनी बरला, रमा खलखो, आदिवासी नेता लक्ष्मी नारायण मुंडा, अजय तिर्की और शिवा कच्छप ने भी रैली में शिरकत की. नेताओं ने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें झारखंड की राजनीति के आदिवासी केंद्रित स्वरूप को कमजोर करना चाहती हैं.
मंच पर तख्तियां, हवा में गूंजते नारे
रैली में शामिल हुए लोग हाथों में तख्तियां लेकर मैदान में डटे रहे. किसी तख्ती पर लिखा था “अनुसूचित क्षेत्र को फ्रीज करना होगा”, तो किसी पर “एमएमडीआर एक्ट 2026 वापस लो”. “जय आदिवासी” के नारे वाली तख्तियां भी भीड़ में हर तरफ नजर आईं. सफेद-लाल पारंपरिक परिधान में मैदान में उमड़ी भीड़ ने पूरे मोरहाबादी को आदिवासी अस्मिता के रंग में रंग दिया.
रैली में ये पांच प्रस्ताव पारित हुए
मंच से पारित प्रस्तावों ने आंदोलन की दिशा साफ कर दी. पहला, परिसीमन के दौरान एसटी के लिए आरक्षित सीटों में किसी तरह की कमी स्वीकार्य नहीं होगी. लोकसभा और विधानसभा की कुल सीटों की संख्या में बढ़ोतरी होती है, तो एसटी के लिए आरक्षित सीटों की संख्या भी उसी अनुपात में बढ़े. दूसरा, केंद्र सरकार द्वारा पारित खान और खनिज (संशोधन) अधिनियम को खारिज किया गया. राज्य सरकार को अपनी भूमि पर कर लगाने और सेस वसूलने का अधिकार मिल. तीसरा, सीएनटी और एसपीटी एक्ट को कड़ाई से लागू किया जाए. आदिवासी भूमि के अवैध हस्तांतरण, कब्जे और खरीद-बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगे. चौथा, पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में बिना ग्रामसभा की सहमति के खनन, अधिग्रहण और विस्थापन पर पूर्ण रूप से रोक लगाई जाए. पांचवां, प्रकृति पूजक आदिवासियों की अस्मिता और धार्मिक पहचान के लिए जनगणना फॉर्म में सरना धर्म कोड का अलग कॉलम जोड़ा जाए.
कहां से शुरू हुई ये मुहिम
ये रैली अचानक नहीं हुई. बंधु तिर्की पहले ही ऐलान कर चुके थे कि परिसीमन में ऐतिहासिक विस्थापन, पलायन, औद्योगीकरण और बदलती जनसांख्यिकी को ध्यान में रखा जाना चाहिए. तैयारियों को लेकर आयोजक गंभीर थे. पूर्व विधायक बंधु तिर्की और केंद्रीय सरना समिति अध्यक्ष अजय तिर्की खुद मोरहाबादी मैदान पहुंचकर व्यवस्था का जायजा ले चुके थे और जो कमियां नजर आईं उन्हें तुरंत दुरुस्त करने का निर्देश दिया था.

सरना धर्म कोड की मांग भी नई नहीं है. कुछ महीने पहले ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल को पत्र लिखकर 2027 की जनगणना में सरना धर्म को अलग पहचान देने की मांग रखी थी, ये बताते हुए कि 2011 की जनगणना में अलग कोड न होने के बावजूद देशभर में करीब 50 लाख लोगों ने अपना धर्म सरना दर्ज कराया था.
मोरहाबादी की भीड़ ने साफ कर दिया कि आदिवासी समाज अब सिर्फ बयानबाजी से संतुष्ट नहीं होने वाला. “अब नहीं तो कभी नहीं” का नारा पूरे मैदान में गूंजा. ज्योत्सना केरकेट्टा की चेतावनी के मुताबिक रांची से शुरू हुआ ये विरोध अब झारखंड के अन्य जिलों तक ले जाया जाएगा. मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी और केंद्र सरकार की चुप्पी के बीच आंदोलन का अगला चरण किस रूप में सामने आएगा, इस पर सबकी नजर रहेगी.


