झारखंड में सरकारी नौकरी की परीक्षाओं को लेकर शुरू हुआ विवाद अब लगातार गहराता जा रहा है. मामला सिर्फ परीक्षाओं के रद्द होने और छात्रों के आंदोलन तक सीमित नहीं है, बल्कि जांच की आंच आयोग के अधिकारियों, परीक्षा कराने वाली एजेंसी, कथित बिचौलियों और परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों तक पहुंच चुकी है. JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के साथ JSSC-CGL मामले में भी CID लगातार गिरफ्तारियां कर रही है.
जांच आगे बढ़ने के साथ इस पूरे मामले की कई परतें खुल रही हैं. JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांगते से लेकर परीक्षा एजेंसी से जुड़े लोगों और सफल अभ्यर्थियों तक पर कार्रवाई हो चुकी है. वहीं, JSSC-CGL मामले में लगातार हो रही गिरफ्तारियों से कथित पेपर लीक नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है. मामले के वित्तीय पहलू की जांच ED भी कर रही है.
लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है. JPSC और JSSC से जुड़े मामले अलग-अलग हैं और दोनों में गिरफ्तारियों का आंकड़ा भी अलग है. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि अब तक किस मामले में कितने लोग गिरफ्तार हुए, कौन-कौन जांच के घेरे में आया और किस तारीख को क्या कार्रवाई हुई. जोहारलाइव की इस खास रिपोर्ट में पढ़िए पूरी गिरफ्तारी की टाइमलाइन.
22 जुलाई से शुरू हुआ गिरफ्तारी का सिलसिला
JPSC मामले में CID की कार्रवाई के दौरान 22 जुलाई 2026 को अभय कुमार तिवारी की गिरफ्तारी हुई. उस समय वह गोड्डा के पोड़ैयाहाट में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर तैनात था. जांच में अभय तिवारी की भूमिका सामने आने के बाद CID ने कथित परीक्षा नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंच बनाई. इसके बाद JPSC की तत्कालीन डिप्टी परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, परीक्षा कराने वाली एजेंसी TDPL से जुड़े रामवीर सिंह, मोहम्मद उस्मान और मोहम्मद इबाद समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया.
जांच एजेंसी का फोकस यह पता लगाने पर रहा कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और परीक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी किन लोगों तक पहुंची.
4 अगस्त: तीन और आरोपी गिरफ्तार
CID ने 4 अगस्त को तीन और लोगों को गिरफ्तार किया. इनमें उमेश कुमार, बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार शामिल हैं. इन गिरफ्तारियों के बाद जांच का दायरा उन लोगों तक भी पहुंचा, जिन पर परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने की कथित साजिश में शामिल होने का संदेह था.
5 अगस्त: पांच लोगों की गिरफ्तारी
इसके अगले दिन यानी 5 अगस्त को CID ने पांच और लोगों को गिरफ्तार किया. इनमें शामिल हैं- रक्षक सिंह, उमाकांत उरांव, रोशन केरकेट्टा, मनोज कुमार और धर्मेंद्र कुमार.
जांच के मुताबिक रक्षक सिंह परीक्षा एजेंसी TDPL से जुड़ा था. वहीं उमाकांत उरांव, रोशन केरकेट्टा और मनोज कुमार के 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में सफल अभ्यर्थी होने की जानकारी सामने आई. धर्मेंद्र कुमार के बारे में जांच में उसके पूर्व JPSC चेयरमैन के कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में काम करने की बात सामने आई. यहीं से जांच में एक अहम सवाल उठा कि क्या परीक्षा में सफल कुछ अभ्यर्थियों का कथित तौर पर परीक्षा नेटवर्क से सीधा संपर्क था?
10 अगस्त: पूर्व JPSC चेयरमैन एल. खियांगते गिरफ्तार
मामले में सबसे बड़ी कार्रवाई 10 अगस्त को हुई. CID ने JPSC के पूर्व चेयरमैन और पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांगते को गिरफ्तार किया. खियांगते की गिरफ्तारी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया. जांच एजेंसी परीक्षा प्रक्रिया, अधिकारियों की भूमिका और परीक्षा कराने वाली एजेंसी से जुड़े कथित कनेक्शन की पड़ताल कर रही है.
18 अगस्त: अभय तिवारी की पत्नी और भाई भी गिरफ्तार
जांच आगे बढ़ने के बाद CID ने 18 अगस्त को अभय तिवारी की पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय कुमार तिवारी को गिरफ्तार किया. दोनों के JSSC-CGL परीक्षा में सफल होने की जानकारी भी सामने आई. इसके बाद जांच का एक हिस्सा JSSC-CGL परीक्षा की ओर मुड़ गया. यहां से JPSC और JSSC मामलों की जांच में कई कड़ियां एक-दूसरे से जुड़ती दिखाई देने लगीं.

27 अगस्त: दो और गिरफ्तारियां, बढ़ी जांच की रफ्तार
27 अगस्त को CID ने JSSC-CGL मामले में सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार को गिरफ्तार किया. जांच के मुताबिक सोमांश परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी से जुड़ा था, जबकि राहुल उसके संपर्क में था. दोनों से पूछताछ के आधार पर CID कथित परीक्षा नेटवर्क की आगे की कड़ियों की तलाश कर रही है.
28 अगस्त: चार सफल अभ्यर्थी गिरफ्तार
JSSC-CGL जांच में 28 अगस्त को बड़ी कार्रवाई हुई. CID ने परीक्षा में सफल चार अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया. इनमें शामिल हैं- दीपक कुमार, विजय कुमार तिवारी, आनंद कुमार सिंह और उमेश कुमार राय.
इनमें दीपक कुमार, विजय कुमार तिवारी और आनंद कुमार सिंह धनबाद से जुड़े बताए गए हैं, जबकि उमेश कुमार राय बोकारो में रह रहे थे. इन गिरफ्तारियों के बाद जांच का फोकस इस सवाल पर और बढ़ गया कि कथित तौर पर परीक्षा से जुड़ी जानकारी या प्रश्नपत्र अभ्यर्थियों तक कैसे पहुंचा और इसके पीछे कौन लोग थे.
31 अगस्त: गिरिडीह से समीर कुमार गिरफ्तार
JSSC-CGL मामले में CID की कार्रवाई 30 अगस्त को भी जारी रही. जांच एजेंसी ने गिरिडीह निवासी समीर कुमार को गिरफ्तार किया.
OMR शीट से लेकर WhatsApp तक जांच
JPSC मामले की जांच केवल प्रश्नपत्र या पेपर लीक के आरोपों तक सीमित नहीं है. CID परीक्षा प्रक्रिया, OMR शीट, अधिकारियों की भूमिका और परीक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी के कथित आदान-प्रदान की भी जांच कर रही है. जांच के दौरान OMR से संबंधित जानकारी के WhatsApp के जरिए साझा किए जाने का मामला भी सामने आया है. अब जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा की गोपनीय प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी बाहर कैसे पहुंची.
ED ने भी संभाला मोर्चा
मामले में अब जांच का वित्तीय पहलू भी महत्वपूर्ण हो गया है. प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने भी कथित भर्ती परीक्षा अनियमितताओं से जुड़े मामले में मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच शुरू की है. इसका मतलब यह है कि जांच अब केवल परीक्षा में गड़बड़ी तक सीमित नहीं है. कथित तौर पर पैसों का लेनदेन हुआ या नहीं, हुआ तो पैसा कहां से आया और कहां गया, इसकी भी पड़ताल की जा रही है.
सात आरोपी अब भी जांच एजेंसी की रडार पर
JPSC मामले में CID ने कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी भी की थी. इनमें आदित्य पांडेय, पवन कुमार सिंह, रविशंकर कुमार, संतोष कुमार सिंह, सानंद प्रकाश, लालू कुमार यादव और सौरभ कुमार पांडेय के नाम सामने आए थे. इन लोगों की तलाश में वारंट के आधार पर कार्रवाई की गई थी.
छात्रों के आंदोलन ने बढ़ाया दबाव
JPSC-JSSC विवाद के बीच राज्य में अभ्यर्थियों का आंदोलन भी लगातार जारी रहा. छात्र परीक्षा की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और पूरे मामले की CBI जांच की मांग कर रहे हैं.
परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के फैसले ने भी विवाद को और बढ़ाया. चयनित अभ्यर्थियों ने इसके खिलाफ अदालत का रुख किया. इसी बीच हाईकोर्ट की कार्रवाई के बाद कई मामलों में स्थिति बदली. सरकार ने भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में सुधार के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने का फैसला भी लिया है.
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