न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में RSS प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम के बाहर प्रदर्शनकारियों ने भारतीय तिरंगे का अपमान किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. रिजिजू ने चेतावनी दी कि सरकार या संगठनों की आलोचना की आज़ादी है, लेकिन देश और झंडे के अपमान की कीमत भारी पड़ेगी.
कहां और कब हुआ मामला?
घटना 29 अगस्त की रात की है. न्यूयॉर्क के मशहूर मैडिसन स्क्वायर गार्डन में उस वक्त RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा कार्यक्रम चल रहा था. “यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन.” यह RSS के शताब्दी वर्ष के जश्न का हिस्सा था. इनफोसिस थिएटर के भीतर छह हजार से ज्यादा भारतीय-अमेरिकी और अलग-अलग धर्मों के लोग मौजूद थे. भागवत का यह दौरा अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के तीन देशों के दौरे का पहला पड़ाव था.
गार्डन के बाहर क्या हुआ?
वेन्यू के बाहर माहौल बिल्कुल अलग था। प्रतिबंधित संगठन सिख्स फॉर जस्टिस यानी SFJ से जुड़े प्रदर्शनकारी जुट गए, जिनकी अगुवाई संगठन के जनरल काउंसिल गुरपतवंत सिंह पन्नू ने की. भीड़ में कुछ लोगों ने तिरंगे को अपने पैर से बांधकर कैमरों के सामने पोज़ दिया. एक और झंडे को फाड़कर जमीन पर पटका गया, और उसके इर्द-गिर्द नाचते हुए जश्न मनाया गया. साथ में खालिस्तान समर्थक नारे लगे, और “मोदी हिंदू आतंक का चेहरा” जैसे बैनर भी दिखाए गए. भागवत के एक कटआउट पर जूतों की माला तक पहनाई गई. रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस प्रदर्शन में सिख कोऑर्डिनेशन कमेटी ईस्ट कोस्ट, शिरोमणि अकाली दल अमृतसर और खालिस्तान अफेयर्स सेंटर जैसे कई और संगठन भी शामिल थे. पुलिस मौके पर मौजूद रही, लेकिन प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोई खास कोशिश होती नहीं दिखी.
रिजिजू की सख्त चेतावनी
वीडियो सोशल मीडिया पर फैलते ही केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ा रुख अपनाया. रविवार को एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने साफ कहा कि RSS, BJP या सरकार की आलोचना करने की आज़ादी सबको है, लेकिन देश और झंडे का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. हिंदी में लिखी अपनी पोस्ट में उन्होंने चेतावनी दी कि झंडे और देश का अपमान करने वालों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.
भागवत ने भाषण में क्या कहा
इस हंगामे के बीच भागवत ने अपने संबोधन में डायस्पोरा को लेकर बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि भारत भले ही प्रवासियों की जन्मभूमि है, लेकिन जिस देश में वे रह रहे हैं वही उनकी कर्मभूमि है, और वहीं की वफादारी पहले निभानी चाहिए.
घटना को लेकर भारत में गुस्सा लगातार बढ़ रहा है. लोग मांग कर रहे हैं कि तिरंगे के अपमान में शामिल लोगों की पहचान कर कार्रवाई हो. साथ ही अमेरिकी प्रशासन से भी सवाल पूछे जा रहे हैं कि मौके पर मौजूद पुलिस ने आखिर इसे रोकने की कोशिश क्यों नहीं की.
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