Ranchi : रांची के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में वाहन बिल भुगतान को लेकर सामने आई कथित वित्तीय अनियमितता ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। महालेखाकार (एजी) झारखंड की ऑडिट रिपोर्ट में करोड़ों नहीं, लेकिन लाखों रुपये के भुगतान में गंभीर गड़बड़ी की ओर इशारा किया गया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद रिम्स प्रबंधन ने सख्त कदम उठाते हुए एक सहायक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है।
रिम्स में मचा हड़कंप, बुलाई गई आपात बैठक
मामले की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार को रिम्स निदेशक की अध्यक्षता में एक अतिआवश्यक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में अपर निदेशक (प्रशासन), चिकित्सा अधीक्षक, अपर चिकित्सा अधीक्षक समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट में उठाई गई आपत्तियों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही संस्थान की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उपायों पर भी विचार किया गया।
वाहन बिल भुगतान में सामने आई बड़ी गड़बड़ी
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार वाहन बिल भुगतान से जुड़े मामलों में गंभीर अनियमितता पाई गई है। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि जिन बिलों का भुगतान चारपहिया वाहनों और बसों के नाम पर किया गया, उनमें कुछ जगहों पर मोटरसाइकिलों के पंजीकरण नंबर दर्ज थे। रिपोर्ट में करीब 9.10 लाख रुपये के भुगतान का उल्लेख किया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर गलत वाहन नंबरों के आधार पर भुगतान कैसे किया गया और इसकी जिम्मेदारी किसकी है।
एक सहायक निलंबित, जांच समिति गठित
रिम्स प्रशासन ने प्रथम दृष्टया जिम्मेदार पाए गए एक सहायक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही पूरे मामले की तह तक जाने के लिए एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की गई है। समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
‘जीरो टालरेंस’ की नीति पर जोर
रिम्स प्रबंधन ने साफ कहा है कि वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। संस्थान ने अनियमितताओं के प्रति ‘जीरो टालरेंस’ की नीति अपनाने की बात दोहराई है। अधिकारियों के अनुसार ऑडिट रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों को गंभीरता से लिया गया है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
टूर एंड ट्रेवल्स की गाड़ियों पर भी उठे सवाल
ऑडिट रिपोर्ट और प्रशासनिक जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार रिम्स में कई अधिकारियों के उपयोग के लिए टूर एंड ट्रेवल्स कंपनियों की गाड़ियां उपलब्ध कराई गई हैं। हालांकि आरोप है कि व्यावसायिक उपयोग में लाई जा रही कुछ गाड़ियों में नियमों के अनुसार पीले रंग की नंबर प्लेट नहीं लगी है, बल्कि वे सफेद नंबर प्लेट के साथ संचालित हो रही हैं। केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के अनुसार यदि कोई वाहन व्यावसायिक उपयोग के लिए पंजीकृत है और यात्रियों को किराए पर ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, तो उस पर पीले रंग की नंबर प्लेट होना अनिवार्य है। ऐसे में इस पहलू की भी जांच की जा रही है।
रिपोर्ट का इंतजार, आगे हो सकती है बड़ी कार्रवाई
रिम्स प्रशासन अब जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद कई और अधिकारियों या कर्मचारियों की जवाबदेही तय हो सकती है। फिलहाल इस मामले ने रिम्स की वित्तीय व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह महज लापरवाही थी या फिर सुनियोजित तरीके से सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला। फिलहाल रिम्स प्रशासन ने साफ कर दिया है कि दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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