Ranchi : झारखंड में अब सभी औद्योगिक इकाइयों को उद्योग विभाग से निबंधन कराना अनिवार्य होगा। राज्य सरकार ने यह कदम झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद उठाया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले (पंकज कुमार वर्णवाल बनाम झारखंड राज्य) में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि राज्य में कार्यरत सभी उद्योगों का निबंधन 30 जून 2026 तक कराया जाए।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद उद्योग विभाग ने अगले एक माह के भीतर सभी औद्योगिक इकाइयों का निबंधन कराने की योजना बनाई है। इसके लिए निबंधन प्रक्रिया पूरी तरह नि:शुल्क होगी।
उद्योग विभाग के अनुसार, राज्य में लगभग एक लाख औद्योगिक इकाइयां हैं, लेकिन विभाग के पास अभी 2000 से भी कम इकाइयों की औपचारिक जानकारी उपलब्ध है। इस स्थिति को देखते हुए उद्योग विभाग ने निबंधन की प्रक्रिया तेज कर दी है।
सिंगल विंडो पोर्टल से होगा निबंधन
उद्योग विभाग ने सभी उद्योगों के निबंधन के लिए सिंगल विंडो पोर्टल पर लिंक जारी कर दिया है। राज्य में स्थापित और कार्यरत सभी औद्योगिक इकाइयों को निर्देश दिया जाएगा कि वे एक माह के भीतर पोर्टल पर निबंधन कराएं। इसके साथ ही जिला उद्योग केंद्रों के महाप्रबंधकों को भी निबंधन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
कामगारों को मिलेगा सीधा लाभ
उद्योगों के निबंधन से वहां काम करने वाले मजदूरों और कर्मचारियों को कई लाभ मिलेंगे। निबंधित उद्योग कानूनी रूप से मान्य होंगे। मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी, बैंक के माध्यम से भुगतान और रोजगार की सुरक्षा मिलेगी। अचानक बंदी, अवैध छंटनी या वेतन न मिलने की स्थिति में श्रम विभाग में शिकायत की जा सकेगी।
इसके अलावा, कामगारों को ईपीएफ और ईएसआई जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलेगा। कार्य के दौरान दुर्घटना होने पर इलाज और मुआवजे की सुविधा भी मिलेगी। काम के घंटे तय होंगे, साप्ताहिक अवकाश मिलेगा और महिला कर्मचारियों को मातृत्व लाभ व सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध होगा।
सरकार को मिलेगा उद्योगों का पूरा डाटा
निबंधन से सरकार के पास राज्य के सभी उद्योगों का प्रामाणिक डाटाबेस तैयार हो जाएगा। इससे यह जानकारी मिलेगी कि किस क्षेत्र में कितने उद्योग हैं, कितने लोगों को रोजगार मिला है, उत्पादन क्षमता और निवेश कितना है। इससे सरकार को बेहतर नीतियां और योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी और श्रम कानूनों का पालन भी सुनिश्चित होगा। साथ ही राज्य के राजस्व में भी वृद्धि होगी।
पहले नहीं था सभी उद्योगों के लिए अनिवार्य
अब तक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (EoDB) के तहत उद्योगों को निबंधन में छूट दी गई थी। स्व-घोषणा के आधार पर काम चल जाता था। छोटे उद्योगों के लिए फैक्ट्री लाइसेंस भी जरूरी नहीं था। केवल वे औद्योगिक इकाइयां जो सरकारी योजनाओं, सब्सिडी, लोन, टेंडर या टैक्स से जुड़ी थीं, उनके लिए निबंधन अनिवार्य था।
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