ओडिशा में आदिवासी समुदायों के बीच स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले डॉक्टर रैंडल सेक्वेरा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. उनकी गिरफ्तारी 16 अक्टूबर को हुई थी, इस गिरफ्तारी का संबंध बॉक्साइट खनन के विरोध से जुड़े एक आंदोलन के दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प से है. पुलिस ने डॉक्टर पर प्रदर्शनकारियों को हिंसा के लिए उकसाने समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं.
रैंडल सेक्वेरा वर्ष 2017 में ओडिशा के कालाहांडी जिले में आदिवासी समुदायों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए पहुंचे थे. उन्होंने दूरदराज के इलाकों में लोगों के इलाज और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर काम किया. बाद में वह बॉक्साइट खनन परियोजनाओं के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों से भी जुड़ गए.
अप्रैल की झड़प के मामले में हुई गिरफ्तारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 7 अप्रैल को ओडिशा के रायगढ़ा जिले के कांटामाल गांव में खनन परियोजना से जुड़ी सड़क निर्माण गतिविधियों के विरोध किया गया था. इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हुई थी. इस घटना में पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों समेत करीब 58 लोगों के घायल होने की खबर आई थी. घटना के बाद कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था.
मामले की जांच के दौरान रैंडल सेक्वेरा की भूमिका सामने आई. इसके बाद 16 अक्टूबर को उन्हें कालाहांडी जिले के भवानीपटना से गिरफ्तार किया गया. दलित अधिकार कार्यकर्ता लक्ष्मण नायक को भी इसी मामले में गिरफ्तार किया गया है.
पुलिस ने दोनों पर हिंसा भड़काने, हत्या के प्रयास और दंगा करने जैसे आरोप लगाए हैं. इसके अलावा आर्म्स एक्ट समेत अन्य गंभीर धाराएं लगाए जाने की बात भी सामने आयी है.
खनन परियोजना का विरोध क्यों?
यह विवाद कालाहांडी और रायगढ़ा जिलों की पहाड़ियों में बॉक्साइट खनन परियोजनाओं से जुड़ा है. इन इलाकों में खनन के खिलाफ स्थानीय आदिवासी समुदाय लंबे समय से विरोध कर रहे हैं. आंदोलनकारियों के अनुसार उनके खनन से जंगल, खेती, पानी और पारंपरिक जीवन पर असर पड़ेगा. वे ग्रामसभा की सहमति और वनाधिकार कानून के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं.
रायगढ़ा जिले के सिजिमाली क्षेत्र में वेदांता की बॉक्साइट खनन परियोजना को लेकर भी विरोध हुआ था. मां माटी माली सुरक्षा मंच सहित कई स्थानीय संगठन इस आंदोलन से जुड़े हैं. डॉक्टर सेक्वेरा पर आरोप है कि उन्होंने खनन विरोधी गतिविधियों में भाग लिया और प्रदर्शनकारियों को उकसाया.
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