Ranchi : झारखंड में खनन और क्रशर उद्योग पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हाल ही में हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद राज्य के लगभग 70 प्रतिशत माइंस और क्रशर यूनिट्स पर बंदी की तलवार लटक गई है। यह स्थिति जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आई, जिससे पूरे खनन क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि 2015 में गठित एनओसी विशेषज्ञ कमेटी को असली विशेषज्ञ कमेटी नहीं माना जा सकता, क्योंकि उसमें विषय के जानकार लोग शामिल नहीं थे। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 2015 की गजट को मान्यता नहीं दी जा सकती। कोर्ट के अनुसार, अब फिर से पुराने नियम ही लागू होंगे, जिसके तहत वनभूमि से माइंस की दूरी 400 मीटर और क्रशर यूनिट की दूरी 500 मीटर मान्य होगी।
उद्योग जगत में चिंता की लहर
इस फैसले के बाद खनन और क्रशर कारोबार से जुड़े लोगों में भारी चिंता देखी जा रही है। चेंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री से मुलाकात की जाएगी और समाधान की मांग की जाएगी। उनका कहना है कि यह सिर्फ कारोबार नहीं बल्कि हजारों लोगों की रोजी-रोटी का सवाल है। जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने 2015 में गजट जारी कर खनन नियमों में बदलाव किया था। इसमें आरक्षित वन क्षेत्र, संरक्षित वन क्षेत्र, रिहायशी इलाके, नदियों और जल स्रोतों तथा शिक्षण संस्थानों से 200 से 250 मीटर की दूरी पर खनन की अनुमति दी गई थी। इससे पहले यह दूरी 400 से 500 मीटर थी। खनन कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि इस फैसले से राज्य के करीब 70 प्रतिशत उद्योग बंद हो सकते हैं। इससे हजारों मजदूरों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। साथ ही सरकार को भी बड़े पैमाने पर राजस्व नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
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