मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड या UCC) का मसौदा तैयार करने के लिए गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री मोहन यादव को सौंप दी है. अधिकारियों के अनुसार, समिति ने अपनी रिपोर्ट में अनुसूचित जनजातियों (आदिवासियों) को UCC के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की है.
सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली बहु-सदस्यीय समिति ने सोमवार, 13 जुलाई को मुख्यमंत्री मोहन यादव को अपनी रिपोर्ट सौंपी. इसके बाद रिपोर्ट को आगे की प्रक्रिया के लिए विधि विभाग को भेज दिया गया है.
सरकारी बयान के अनुसार, वरिष्ठ सचिवों की समिति द्वारा रिपोर्ट की समीक्षा और विचार के बाद कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर आगामी मानसून सत्र में UCC से संबंधित विधेयक राज्य विधानसभा में पेश किया जा सकता है. बता दें, मध्य प्रदेश विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है. दूसरी तरफ सीएम मोहन यादव ने निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट सौंपने के लिए समिति की अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया.
रिपोर्ट सौंपने के दौरान समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठणकर और सदस्य सचिव अजय कटेसरिया मौजूद रहे. वहीं, न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई, समिति के सदस्य एवं वरिष्ठ सलाहकार शत्रुघ्न सिंह तथा एक अन्य सदस्य अनुप नायर व्यक्तिगत कारणों से कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके.
मोहन यादव ने जताया आभार, आए 9 लाख से अधिक आवेदन
सरकारी बयान के मुताबिक, रिपोर्ट को तीन भागों में तैयार किया गया है. पहले भाग में 10 अध्याय हैं, जिनमें विभिन्न अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय कानूनों तथा व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के बाद समिति की सिफारिशें दी गई हैं. दूसरे भाग में UCC का मसौदा विधेयक शामिल है.
समिति द्वारा तैयार किया गया यह मसौदा मध्य प्रदेश में प्रचलित कानूनों और नियमों को ध्यान मंध रखकर बनाया गया है. प्रस्तावित विधेयक में चार भाग, 404 धाराएं और सात अनुसूचियां शामिल हैं.
रिपोर्ट के तीसरे भाग में समिति द्वारा जिला, राज्य और वेबसाइट स्तर पर किए गए व्यापक जनपरामर्श का विवरण दिया गया है. समिति को 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए, जिनका प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण भी इस भाग में शामिल किया गया है.
सरकारी बयान में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि समिति ने अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की है.
गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा गठित इस उच्चस्तरीय समिति को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत और पारिवारिक मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनों और व्यवस्थाओं का अध्ययन कर UCC का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.
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