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    Home»जोहार ब्रेकिंग»‘भारत की कोकिला’ से ‘वॉइस ऑफ द मिलेनियम’ तक, लता मंगेशकर की सुरमयी विरासत को 97वीं जयंती पर सलाम
    जोहार ब्रेकिंग

    ‘भारत की कोकिला’ से ‘वॉइस ऑफ द मिलेनियम’ तक, लता मंगेशकर की सुरमयी विरासत को 97वीं जयंती पर सलाम

    Muskan ChoudharyBy Muskan ChoudharySeptember 28, 2026No Comments6 Mins Read2
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    लता मंगेशकर
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    मुस्कान चौधरी 

    ‘भारत की कोकिला’, ‘क्वीन ऑफ मेलोडी’ और ‘वॉइस ऑफ द मिलेनियम’… आज उस महान आवाज की 97वीं जयंती है, जिसने दशकों तक भारतीय संगीत को अपनी सुरमयी आवाज से सजाया. लता मंगेशकर भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गीत और उनकी आवाज आज भी करोड़ों दिलों में जिंदा हैं.

    28 सितंबर 1929 को इंदौर में जन्मी एक बच्ची ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि उसकी आवाज आने वाले दशकों तक करोड़ों लोगों की भावनाओं की आवाज बन जाएगी. वह बच्ची थीं लता मंगेशकर. छह दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने सिर्फ गाने नहीं गाए, बल्कि भारतीय सिनेमा के संगीत को एक ऐसी आवाज दी, जिसकी गूंज पीढ़ियां बदलने के बाद भी कायम है.  अपने शानदार करियर में, उन्होंने 14 अलग-अलग भाषाओं में लगभग 30,000 गाने रिकॉर्ड किए.

    लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर के मराठी परिवार में पंडित दीनदयाल मंगेशकर के घर हुआ था.  लता जी की मां का नाम श्रीमती माई था. जन्म के समय लता जी का नाम हेमा रखा गया था, लेकिन कुछ समय बाद उनके पिता ने थिएटर के कैरेक्टर लतिका के नाम पर उनका नाम लता रख दिया. लता जी के पिता ने अपने गांव मंगेशी के नाम पर अपना उपनाम मंगेशकर रखा था. इनके पिता रंगमंच के कलाकार और गायक थे. संगीत लता दीदी को विरासत में मिला. अभिनय में भी उनकी दिलचस्पी थी और लता ने पांच साल की छोटी उम्र में पहली बार एक नाटक में अभिनय किया. आगे चलकर उनके भाई हृदयनाथ मंगेशकर और बहनें आशा भोंसले, उषा मंगेशकर और मीना मंगेशकर ने भी संगीत को ही अपना करियर बनाया.

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    बचपन से ही लता की रुचि गायन में थी. वे मशहूर गायक कुंदन लाल सहगल से बेहद प्रभावित थीं. लेकिन उनकी जिंदगी ने जल्द ही ऐसा मोड़ लिया, जिसने उनके बचपन को जिम्मेदारियों में बदल दिया. जब लता महज 13 साल की थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया. परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया. लता को परिवार की मदद के लिए फिल्मों में काम करना पड़ा. अभिनय उन्हें खास पसंद नहीं था, लेकिन हालात ने उन्हें कैमरे के सामने खड़ा कर दिया.

    गायिकी के सफर की बात करें तो लता मंगेशकर ने सिर्फ 13 साल की उम्र में ही फिल्म ‘पहिली मंगलागौर’ से डेब्यू किया था. लता मंगेशकर की पहली कमाई 25 रुपये थी. उन्होंने 1942 में वसंत जोगलेकर की मराठी फिल्म ‘किती हसाल’ के लिए गाना गाया था. लता मंगेशकर को पहचान फिल्म महल के गाने ‘आएगा आने वाला’ से मिली थी.

    ‘आयेगा आनेवाला’ ने बदल दी पूरी कहानी

    साल 1949. फिल्म थी ‘महल’. अभिनेत्री थीं मधुबाला और आवाज थी लता मंगेशकर की. गीत था ‘आयेगा आनेवाला’. यह गीत लता के करियर का निर्णायक मोड़ बना. फिल्म की सफलता के साथ उनकी आवाज घर-घर पहुंचने लगी. इसके बाद लता ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. एक ऐसी गायिका, जो कुछ साल पहले परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों के बीच संघर्ष कर रही थी, अब हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े नामों में शामिल हो चुकी थी.

    लता मंगेशकर ने अपने लंबे करियर में अलग-अलग भाषाओं में फिल्मी और गैर-फिल्मी गीत गाए. उपलब्ध सामग्री के अनुसार उन्होंने 20 से ज्यादा भाषाओं में 30 हजार से अधिक गीत गाए. उनकी आवाज की खासियत यही थी कि वह सिर्फ शब्दों को नहीं गाती थी, भावनाओं को भी आवाज देती थी.

    यही वजह रही कि उनकी लोकप्रियता सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही. भारतीय उपमहाद्वीप से लेकर दुनिया के कई हिस्सों तक उनके गीत सुने गए. उन्हें प्यार से लोग ‘लता दीदी’ कहकर बुलाते रहे. उनकी छोटी बहन आशा भोंसले भी भारतीय फिल्म संगीत की बड़ी आवाज बनीं. दोनों बहनों का योगदान हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण रहा.

    रिकॉर्डिंग स्टूडियो में एक अलग अनुशासन

    Lata Mangeshkar Unknown Facts Veteran Singer Lata Mangeshkar Passes Away In Mumbai

    लता मंगेशकर की पहचान सिर्फ उनकी आवाज से नहीं थी. उनके काम करने के तरीके ने भी उन्हें अलग बनाया. उपलब्ध सामग्री के अनुसार वह स्टूडियो या स्टेज पर गाते समय अक्सर नंगे पैर रहती थीं. उनके लिए गायन सिर्फ पेशा नहीं, एक तरह की साधना था. 1980 के बाद उन्होंने फिल्मों में गायन कुछ कम किया और स्टेज शो पर अधिक ध्यान दिया. उन्होंने फिल्मों का निर्माण भी किया और संगीत निर्देशन से भी जुड़ी रहीं.

    लता मंगेशकर के योगदान को देश और दुनिया के कई बड़े सम्मानों से स्वीकार किया गया. उन्हें 1969 में पद्म भूषण, 1989 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार और 1999 में पद्म विभूषण मिला. इसके बाद 2001 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया. उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिले और फिल्मफेयर समेत कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया. 1974 में उनके नाम दुनिया में सबसे अधिक गीत गाने का गिनीज बुक रिकॉर्ड भी दर्ज किया गया था.

    आखिरी सफर भी संगीत की स्मृतियों से जुड़ा रहा

    जनवरी 2022 में लता मंगेशकर कोविड-19 से संक्रमित हुईं और मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती हुईं. कुछ समय तक उनकी हालत में सुधार के संकेत मिले, लेकिन बाद में उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई. 6 फरवरी 2022 को 92 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया.

    Lata Mangeshkar Last Days: लतादीदी: हॉस्पिटलमध्ये ईयरफोन मागविले, वडिलांची  गाणी ऐकली, अन् प्राण सोडले Maharashtra Marathi News | Lata Mangeshkar Last  two Days: Lata Didi Ordered earphones in ...

    लता मंगेशकर का निधन वसंत पंचमी के अगले दिन हुआ. वसंत पंचमी संगीत और ज्ञान की देवी सरस्वती को समर्पित पर्व है. इस संयोग ने उनके निधन को और भावुक बना दिया. लता की आवाज को संगीत और सरस्वती से जोड़कर देखने वाली भावनाएं लंबे समय से लोगों के बीच रही हैं. अभिनेत्री रानी मुखर्जी ने भी उनके निधन के बाद इसी भाव का उल्लेख किया था.

    उनका अंतिम संस्कार मुंबई के शिवाजी पार्क में पूरे राजकीय सम्मान के साथ हुआ. देशभर में शोक की लहर थी. भारत सरकार ने दो दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की और राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाया गया. उनके निधन पर भारत ही नहीं, दूसरे देशों से भी श्रद्धांजलियां आईं. संगीत और फिल्म जगत के साथ खेल और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई लोगों ने उन्हें याद किया. यहां तक कि भारतीय क्रिकेट टीम ने भी उनके निधन पर काली पट्टी बांधकर श्रद्धांजलि दी. 10 फरवरी 2022 को उनकी अस्थियों को नासिक के रामकुंड में गोदावरी नदी में विसर्जित किया गया. लेकिन लता मंगेशकर की कहानी यहीं खत्म नहीं होती.

    किसी कलाकार की असली विरासत उसके जाने के बाद शुरू होती है. लता मंगेशकर के मामले में यह विरासत उनके गाए हजारों गीतों में दर्ज है. प्रेम हो, विरह हो, भक्ति हो, देशभक्ति हो या जिंदगी का कोई अकेला पल, उनकी आवाज ने हर भाव को अपना सुर दिया.

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