महोबा पुलिस ने एआई तकनीक इस्तेमाल कर झारखंड की भटकी महिला को उसके परिजनों से मिला दिया. 20 सितंबर को खरेला के बल्लायं गांव में भटकी महिला मिली थी, जो अपना नाम-पता नहीं बता पा रही थी. वन स्टॉप सेंटर प्रभारी उप-निरीक्षक शिवांगी गुप्ता ने एआई तकनीक की मदद से उसके टूटे-फूटे शब्दों को विश्लेषित कर झारखंड निवासी हीरा तोपनो के रूप में पहचान की और सकुशल परिजनों के सुपुर्द किया.
दरअसल, बीती 20 सितंबर को महोबा के थाना खरेला क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बल्लायं में एक अज्ञात महिला के लावारिस हालत में भटकने की सूचना पीआरवी को मिली थी. सूचना मिलते ही प्रभारी निरीक्षक खरेला और मिशन शक्ति की टीम तत्काल मौके पर पहुंची. महिला को सुरक्षित वन स्टॉप सेंटर लाया गया. महिला मानसिक रूप से असहज थी, जिसके पास न तो कोई पहचान पत्र था और ना ही कोई मोबाइल. वह अपना नाम और पता बताने में भी पूरी तरह असमर्थ थी.
मामले की गंभीरता को देखते हुए वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी उप-निरीक्षक शिवांगी गुप्ता ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मोर्चा संभाला. महिला द्वारा बोले जा रहे बेहद टूटे-फूटे शब्दों को ध्यान से समझा गया और आधुनिक एआई तकनीक का सहारा लेकर उन शब्दों और संभावित स्थानों का विश्लेषण किया गया.
AI तकनीक की मदद से हुई महिला की पहचान
एआई तकनीक की इस सटीक मदद से आखिरकार महिला की पहचान झारखंड निवासी हीरा तोपनो पत्नी रम्भा तोपनो के रूप में हो सकी. इसके बाद महोबा पुलिस ने झारखंड की स्थानीय पुलिस से संपर्क साधा और महिला के परिजनों को खोज निकाला. महोबा पुलिस से अपनी खोई हुई महिला के सकुशल मिलने की खबर सुनते ही परिजनों के चेहरे खुशी से खिल उठे.
इस पूरे मामले पर महोबा की एएसपी वंदना सिंह ने बताया, महिला न अपना नाम-पता बता पा रही थी, न उसके पास कोई पहचान पत्र था और न ही मोबाइल फोन. उसे वन स्टॉप सेंटर में रखा गया. सेंटर की प्रभारी उप-निरीक्षक शिवांगी गुप्ता ने उसकी टूटी-फूटी बातों और उसके दिए संकेतों को समझने की कोशिश की. उपलब्ध तकनीकी संसाधनों और एआई तकनीक की मदद से संभावित नामों और जगहों का विश्लेषण किया गया, जिससे यह साफ हुआ कि वह झारखंड की रहने वाली है.
पुलिस ने महिला को परिजनों के किया सुपुर्द
परिजनों के महोबा पहुंचने पर कानूनी प्रक्रिया पूरी कर महिला को उनके सुपुर्द कर दिया गया. इतना ही नहीं, महोबा पुलिस ने परिजनों के आने-जाने और सुरक्षित आवागमन की भी पूरी व्यवस्था की. महोबा पुलिस के इस सराहनीय और संवेदनशील कार्य की हर तरफ जमकर तारीफ हो रही है.
महोबा पुलिस ने तकनीक और मानवीय संवेदनाओं का बेहतरीन तालमेल दिखाते हुए एक बार फिर खाकी का सिर फक्र से ऊंचा कर दिया है. सैकड़ों किलोमीटर दूर झारखंड से भटक कर महोबा पहुंची एक महिला के लिए महोबा पुलिस उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई और उसे सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचाया.
Also Read:एशियन गेम्स में महिला हॉकी : मात्र 4 मैच और 59 गोल, कहर बरपा रही भारतीय खिलाड़ी

