झारखंड विधानसभा में JSSC-CGL परीक्षा विवाद का मुद्दा एक बार फिर उठा. भाकपा माले के विधायक अरूप चटर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष रबिन्द्रनाथ महतो के जरिए सरकार से इस मामले का समाधान निकालने की मांग की. उन्होंने कहा कि छात्रों की 98 फीसदी मांगें सरकार ने मान ली हैं, लेकिन JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर छात्र अब भी आंदोलन पर डटे हुए हैं.
सदन की कार्यवाही के दौरान सूचना के माध्यम से अरूप चटर्जी ने कहा कि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं. उनकी कई मांगों को सरकार ने स्वीकार भी किया है. इसके बावजूद JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के मुद्दे पर गतिरोध बना हुआ है. उन्होंने सरकार से इस मामले में ऐसा रास्ता निकालने की मांग की, जिससे छात्रों की मांगों का समाधान हो सके और आंदोलन खत्म कराया जा सके.

आंदोलन में उपद्रवी तत्वों की पहचान की जरूरत
माले विधायक ने कहा कि छात्रों के आंदोलन में कुछ उपद्रवी तत्व भी घुस गए हैं. ऐसे लोगों को चिह्नित करने की जरूरत है, ताकि शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे छात्रों और उपद्रवी तत्वों के बीच अंतर किया जा सके.
उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्रों की समस्याओं का समाधान बातचीत और संवैधानिक तरीके से किया जाना चाहिए. साथ ही, अगर JSSC-CGL परीक्षा को लेकर कानूनी अड़चन है तो सरकार कोर्ट का सहारा लेकर इसका रास्ता निकाल सकती है.
कोर्ट के जरिए समाधान निकालने की मांग
अरूप चटर्जी ने सरकार से मांग की कि JSSC-CGL मामले में कोर्ट के जरिए भी समाधान तलाशा जाए. उनका कहना है कि सरकार को ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिससे छात्रों की मांगों पर फैसला हो और लंबे समय से चल रहा आंदोलन समाप्त हो सके.
गौरतलब है कि JSSC-CGL परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं. छात्र परीक्षा रद्द करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े हैं. वहीं, सरकार की ओर से भी मामले में जांच और बातचीत की प्रक्रिया जारी है. ऐसे में विधानसभा के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर लगातार आवाज उठ रही है.



