Ranchi: झारखंड में 35 करोड़ रुपये के टेंडर कमीशन घोटाले में अब कानूनी प्रक्रिया ने पूरी तरह से रफ्तार पकड़ ली है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों का पालन करते हुए 21 अप्रैल 2026 से स्पेशल कोर्ट में इस चर्चित मामले की डे-टू-डे सुनवाई शुरू हो गई है। यह मामला राज्य के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम से जुड़ा है, जो मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के चलते लंबे समय से जेल में बंद हैं। इस त्वरित सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इस पूरे मामले की जड़ें मई 2024 में ईडी द्वारा की गई छापेमारी से जुड़ी हैं।
उस दौरान आलमगीर आलम के पूर्व निजी सचिव संजीव लाल और उनके सहयोगी जहांगीर आलम के परिसरों से 32.20 करोड़ रुपये से अधिक की भारी नकदी बरामद हुई थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि झारखंड में टेंडर आवंटन के दौरान 3% कमीशन की एक सुनियोजित व्यवस्था चल रही थी, जिसके माध्यम से अवैध रूप से धन अर्जित किया गया और फिर उसे लॉन्डर किया गया। ईडी के अनुसार, इस पूरे घोटाले की राशि 90 करोड़ रुपये से अधिक है, जो लगभग 3,048 करोड़ रुपये के टेंडरों से जुड़ी हुई है। इसी मामले में 15 मई 2024 को पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया गया था।
इस केस में संजीव लाल और जहांगीर आलम के अलावा ग्रामीण विकास विभाग के चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम समेत कई अन्य अधिकारी भी ट्रायल का सामना कर रहे हैं। कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और ईडी द्वारा जब्त किए गए महत्वपूर्ण दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में पेश किया जा रहा है। इन दस्तावेजों में एग्रीमेंट, बैंक स्टेटमेंट और रजिस्ट्री डीड जैसी अहम चीजें शामिल हैं।
सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए जेल में बंद मुख्य आरोपी आलमगीर आलम, संजीव लाल और जहांगीर आलम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश किया जा रहा है, जबकि अन्य आरोपियों के वकील व्यक्तिगत रूप से सुनवाई में उपस्थित हो रहे हैं। गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने आलमगीर आलम और संजीव लाल की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। सर्वोच्च न्यायालय ने ईडी को यह सख्त निर्देश दिया था कि अगले चार सप्ताह के भीतर मामले से जुड़े महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही पूरी की जाए।
इसी आदेश के अनुपालन में अब डे-टू-डे सुनवाई का दौर शुरू हुआ है। झारखंड की राजनीति में यह मामला बेहद चर्चित रहा है, क्योंकि इसमें टेंडर प्रक्रिया में कथित कमीशनखोरी और बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे हैं। आने वाले दिनों में और भी महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज होने की संभावना है, जिससे इस ट्रायल में तेजी आने की उम्मीद है।
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