रांची : जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजे के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे भैरवा जलप्रपात परियोजना के रैयतों को झारखंड हाईकोर्ट से राहत मिली है. अदालत ने मुआवजे की दर में बढ़ोतरी के खिलाफ रामगढ़ के उपायुक्त की ओर से दायर अपील खारिज कर दी. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी कार्यालय में आवेदन गुम होने या अधिकारियों की लापरवाही के लिए जमीन मालिकों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.
मामला रामगढ़ जिले के गोला थाना क्षेत्र स्थित हेरमदगा गांव का है. भैरवा जलप्रपात परियोजना के लिए यहां 0.20 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था. इसके एवज में भू-स्वामियों को महज 8526.89 रुपये मुआवजा दिया गया था. रैयतों ने इस राशि को अपर्याप्त बताते हुए मुआवजे में बढ़ोतरी की मांग की थी.
इससे पहले विशेष भू-अर्जन न्यायालय ने एक मामले में मुआवजे की दर बढ़ाकर 8923 रुपये प्रति डिसमिल निर्धारित की थी. यह फैसला अंतिम हो चुका था. इसके आधार पर दूसरे प्रभावित रैयतों ने भी समान दर से मुआवजा देने की मांग की.
रैयतों का कहना था कि उन्होंने 9 अगस्त 2008 को निर्धारित तीन महीने की समय सीमा के भीतर विशेष भू-अर्जन पदाधिकारी के कार्यालय में आवेदन जमा किया था. लेकिन कार्यालय के प्रधान लिपिक ने आवेदन गायब कर दिया. इस कारण उनके दावे पर समय रहते कार्रवाई नहीं हो सकी.
सरकारी कार्यालय की लापरवाही पर अदालत की टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार ने अपने जवाब में आवेदन समय पर जमा किए जाने और उसके कार्यालय से गायब होने के आरोपों का स्पष्ट खंडन नहीं किया. अदालत ने यह भी गौर किया कि विशेष भू-अर्जन पदाधिकारी ने आवेदन पर खुद निर्णय लेने के बजाय उसे सीधे अदालत भेज दिया था.
ऐसी स्थिति में सरकार बाद में यह सवाल नहीं उठा सकती कि आवेदन निर्धारित समय सीमा के बाद दाखिल किया गया था. अदालत ने माना कि सरकारी कार्यालय की लापरवाही का नुकसान रैयतों को नहीं उठाना पड़ेगा.
अपील की सुनवाई के दौरान कुछ प्रतिवादियों की मृत्यु हो गई थी, लेकिन उनके कानूनी उत्तराधिकारियों को मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया. अदालत ने मुआवजे से जुड़े फैसले को अविभाज्य प्रकृति का माना. ऐसे में कुछ प्रतिवादियों के खिलाफ अपील समाप्त होने का असर पूरी अपील पर पड़ा.
इन कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने रामगढ़ के उपायुक्त की प्रथम अपील खारिज कर दी. इसके साथ ही विशेष भू-अर्जन न्यायालय की ओर से निर्धारित बढ़ी हुई मुआवजा दर का फैसला बरकरार रहा.
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