Ranchi : झारखंड के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) राजीव रंजन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा मुख्य सचिव को भेज दिया है। महाधिवक्ता कार्यालय की ओर से भी उनके इस्तीफे की पुष्टि कर दी गई है। हालांकि, अभी तक उनके इस्तीफे के पीछे की वजह सार्वजनिक नहीं की गई है। राजीव रंजन फरवरी 2020 से झारखंड के महाधिवक्ता के पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद बनी हेमंत सोरेन सरकार ने उन्हें 7 फरवरी 2020 को राज्य का महाधिवक्ता नियुक्त किया था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने झारखंड सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण संवैधानिक, प्रशासनिक और नीतिगत मामलों में उच्च न्यायालय सहित विभिन्न न्यायिक मंचों पर प्रभावी ढंग से पक्ष रखा।
कौन हैं राजीव रंजन?
राजीव रंजन झारखंड के वरिष्ठ और अनुभवी अधिवक्ताओं में गिने जाते हैं। उनका जन्म 29 दिसंबर 1968 को हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रांची के डीएवी जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली से प्राप्त की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज से रसायन विज्ञान में स्नातक (ऑनर्स) की पढ़ाई की। फिर कैंपस लॉ सेंटर, दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की और वर्ष 1994 में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया।
कानूनी क्षेत्र में लंबा अनुभव
राजीव रंजन को संवैधानिक कानून, सेवा कानून, श्रम कानून, कंपनी कानून तथा दीवानी और आपराधिक मामलों में व्यापक अनुभव प्राप्त है। वे वर्ष 2011 से 2012 तक झारखंड के अपर महाधिवक्ता (एडिशनल एडवोकेट जनरल) के पद पर भी कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने राज्य सरकार के अधिवक्ता और गृह विभाग के विशेष अधिवक्ता के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।
इस्तीफे के कारणों पर अटकलें
राजीव रंजन के इस्तीफे के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि, अब तक न तो महाधिवक्ता कार्यालय और न ही राज्य सरकार की ओर से इस्तीफे के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। ऐसे में उनके इस्तीफे के पीछे की वजह को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
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