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    Home»ट्रेंडिंग»ईरान की सख्त शर्तें और कूटनीतिक गतिरोध: क्या वार्ता की मेज तक पहुंच पाएगा तेहरान
    ट्रेंडिंग

    ईरान की सख्त शर्तें और कूटनीतिक गतिरोध: क्या वार्ता की मेज तक पहुंच पाएगा तेहरान

    Team JoharBy Team JoharApril 21, 2026No Comments2 Mins Read3
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    Islamabad: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों के बीच इस्लामाबाद इस वक्त वैश्विक कूटनीति का ‘पावर सेंटर’ बना हुआ है, जहाँ अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता की मेज बिछाने की कोशिशें अपने चरम पर हैं। इस पूरी कवायद की कमान पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने संभाल रखी है, जिन्होंने पिछले कुछ दिनों से वॉशिंगटन से लेकर रियाद, तेहरान, दोहा और अंकारा तक फोन कॉल्स की झड़ी लगा दी है। सूत्रों के मुताबिक, जनरल मुनीर ने ईरान के राजनीतिक नेतृत्व और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से सीधे बात कर उन्हें सुरक्षा और राजनीतिक सहयोग का भरोसा दिलाया है।

    हालांकि, इस कूटनीतिक हलचल के बीच सबसे बड़ा पेंच ईरान की तरफ से फंसा हुआ है। पर्दे के पीछे की सच्चाई यह है कि जनरल मुनीर की तमाम कोशिशों के बावजूद तेहरान का रुख फिलहाल बेहद सख्त और संशय से भरा हुआ है। ईरान न केवल बातचीत को लेकर हिचकिचा रहा है, बल्कि उसकी तरफ से बार-बार शर्तें रखी जा रही हैं, जो यह संकेत देती हैं कि तेहरान इस वार्ता को लेकर ‘ना’ के करीब भी हो सकता है। ईरानी नेतृत्व अमेरिका के साथ किसी भी समझौते या बातचीत को लेकर बेहद सतर्क है और वे ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर पूरी तरह भरोसा करने को तैयार नहीं हैं।

    स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरी वार्ता की सफलता अब ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के एक अकेले फैसले पर टिकी है। भले ही पाकिस्तान ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा के लिए वायुसेना जैसे पुख्ता इंतजाम किए हों, लेकिन ईरान के अंदरूनी हलकों में चल रही सुगबुगाहट यह बताती है कि वे बातचीत के लिए तैयार होने से पहले हर पहलू को तौल रहे हैं। अगर खामेनेई ने हरी झंडी नहीं दी, तो इस्लामाबाद में होने वाली यह ‘महाबैठक’ महज एक सपना बनकर रह जाएगी। फिलहाल, पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जनरल मुनीर का पीस प्लान कामयाब होगा, या तेहरान की ओर से आने वाला एक ना का संदेश इस पूरी कूटनीतिक कोशिश पर पानी फेर देगा। आने वाले कुछ घंटे यह तय करेंगे कि क्या क्षेत्र में शांति की कोई गुंजाइश है या फिर तनाव और अधिक विकराल रूप लेने वाला है।

    Also Read : पश्चिम बंगाल चुनाव: पीएम मोदी की झालमुड़ी के बाद अब चंपाई सोरेन की ‘माछ-भात’ वाली तस्वीर वायरल

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