Ranchi : राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में लंबे समय से चल रही परियोजनाएं समस्या को दूर करने की दिशा में अब बड़ी पहल शुरू हुई है। गर्मी और हीटवेव के बीच मरीजों, उनके मरीजों और अस्पताल आने वाले लोगों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा था। ऐसे में अब रिम्स प्रशासन ने खराब पड़े परियोजनाएं इकाइयों को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया है। रिम्स प्रशासन के समन्वय से मिनु मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड ने अपनी सीएसआर पहल के तहत अस्पताल परिसर में लगी परियोजनाएं इकाइयों के तकनीकी सर्वे, मरम्मत और रखरखाव में सहयोग देने की सहमति दी है। कंपनी की ओर से दिए गए प्रस्ताव को रिम्स प्रबंधन ने मंजूरी दे दी है। इस पहल की जिम्मेदारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हिरेन्द्र बिरुआ की अध्यक्षता में आगे बढ़ाई जा रही है। इस दौरान डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. डॉ. शिव प्रिये, डॉ. अजय कुमार, डॉ. साकेत वर्मा और डॉ. शिशिर भी मौजूद रहे।
शुरुआती जांच में 10 यूनिट मिली खराब
रिम्स परिसर में अलग-अलग जगहों पर लगी पेयजल यूनिटों की शुरुआती तकनीकी जांच की गई। जांच में करीब 10 यूनिट ऐसी मिलीं, जिन्हें मामूली मरम्मत, सर्विसिंग और कुछ पुर्जे बदलकर फिर से चालू किया जा सकता है। पहले चरण में इन्हीं यूनिटों को दुरुस्त किया जाएगा। इसके बाद जरूरत के हिसाब से अन्य मशीनों की भी मरम्मत और तकनीकी बदलाव किए जाएंगे ताकि अस्पताल में लगातार साफ पेयजल उपलब्ध हो सके।
नियमित मेंटेनेंस की भी होगी व्यवस्था
रिम्स प्रशासन अब सिर्फ मरम्मत तक सीमित नहीं रहना चाहता। योजना है कि अधिकृत सर्विस एजेंसियों के जरिए इन पेयजल इकाइयों का नियमित मेंटेनेंस भी कराया जाए। इससे भविष्य में मशीनें लंबे समय तक खराब नहीं रहेंगी और मरीजों को राहत मिलेगी। बीते कुछ दिनों से रांची समेत पूरे झारखंड में भीषण गर्मी पड़ रही है। इसी बीच रिम्स में पेयजल संकट की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। कई मरीजों और उनके परिजनों को बाहर से पानी खरीदकर लाना पड़ रहा था। कुछ रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि अस्पताल में साफ पानी की कमी से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। रिम्स में पानी की समस्या कोई नई नहीं है। इससे पहले भी कई बार पाइपलाइन खराब होने और पानी सप्लाई बाधित होने की वजह से मरीजों और उनके परिजनों को परेशान होना पड़ा है।
अब लोगों को राहत मिलने की उम्मीद
रिम्स प्रशासन की इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में अस्पताल में पेयजल व्यवस्था काफी बेहतर होगी। खासकर गर्मी के मौसम में मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिल सकती है। साथ ही CSR के जरिए निजी कंपनियों की भागीदारी से अस्पताल की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।
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