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    Home»क्राइम»तह तक : अमित शाह के दौरे पर पुलिसकर्मियों की जान लेने वाले रविंद्र गंझू के बारे में पूरी जानकारी
    क्राइम

    तह तक : अमित शाह के दौरे पर पुलिसकर्मियों की जान लेने वाले रविंद्र गंझू के बारे में पूरी जानकारी

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkJuly 13, 2026No Comments4 Mins Read4
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    रविंद्र गंझू
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    झारखंड पुलिस और सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियान में एक ऐतिहासिक सफलता मिली है. लंबे समय से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहे खूंखार नक्सली रविंद्र गंझू को लातेहार जिले के हेसला गांव से गिरफ्तार कर लिया गया है. इस कुख्यात नक्सली पर कुल 20 लाख रुपये का इनाम था, जिसमें झारखंड सरकार ने 15 लाख रुपये और NIA यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 5 लाख रुपये की घोषणा कर रखी थी. गिरफ्तारी के वक्त पुलिस टीम ने उसके पास से एक खतरनाक एके–56 राइफल और एक पिस्टल बरामद की है. रविंद्र गंझू का पकड़ा जाना भाकपा (माओवादी) संगठन के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है.

    झारखंड में पहली बार एनआईए कोर्ट ने रविन्द्र गंझू को दिया था अल्टीमेटम

    रविंद्र गंझू उर्फ कमलेश उर्फ सुरेंद्र गंझू पर झारखंड के अलग-अलग थानों में 55 से अधिक नक्सली हिंसा के मामले दर्ज हैं. वह मुख्य रूप से लोहरदगा, लातेहार और गुमला जिलों के सीमावर्ती जंगलों में सक्रिय रहकर बड़ी वारदातों को अंजाम देता था. उसके ऊपर कई पुलिसकर्मियों की हत्या और भारी मात्रा में लेवी (रंगदारी) वसूलने के गंभीर आरोप हैं. वह एनआईए के केस नंबर आरसी 2/22 और आरसी-38/2020 में काफी समय से फरार चल रहा था. बीते मई महीने में रांची की विशेष एनआईए अदालत ने उसके खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए 30 दिनों का अल्टीमेटम जारी किया था. कोर्ट ने साफ कहा था कि या तो वह अदालत में पेश हो, नहीं तो उसकी गैर-मौजूदगी में ही सजा की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. जांच एजेंसियों ने लातेहार के हेसला और बॉझीटोला स्थित उसके घर और सार्वजनिक जगहों पर इसके नोटिस भी चिपकाए थे.

    अमित शाह के दौरे के दौरान पुलिसकर्मियों पर किया हमला, चार हो गये थे शहीद

    एनआईए की जांच में रविंद्र गंझू की क्रूरता और बड़ी साजिशों का भी सनसनीखेज खुलासा हुआ है. 22 नवंबर 2019 को जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह चुनावी जनसभा के लिए चंदवा आए थे, तब सुरक्षाबलों की भारी मुस्तैदी के बीच रविंद्र के निर्देश पर लुकैया मोड़ के पास पुलिस की गश्ती टीम पर घात लगाकर हमला किया गया था. इस वीआईपी मूवमेंट के दौरान हुए हमले में एएसआई शुकरा उरांव सहित चार पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे और नक्सली उनके हथियार व कारतूस लूट ले गए थे. एनआईए ने पाया कि इस घटना को अंजाम देने के लिए रविंद्र गंझू ने अपने ओवर ग्राउंड वर्कर सुनील गंझू, फगुना गंझू और बैजनाथ गंझू का इस्तेमाल किया था. फगुना झाड़ियों में छिपकर पुलिस की रेकी कर रहा था, जबकि सुनील अपनी बाइक पर हमलावर दस्ते के दो शूटरों को बीरजांघा जंगल से लेकर वारदात की जगह तक आया था. इस सफल हमले और हथियारों की लूट से खुश होकर रविंद्र गंझू ने बोदा तालाब के पास अपने इन मददगारों को पांच-पांच हजार रुपये का इनाम भी बांटा था.

    हाईटेक गैजेट्स का इस्तेमाल कर सुन लेता था पुलिस की वायरलेस बातचीत

    भाकपा (माओवादी) में रविंद्र गंझू का कद बहुत बड़ा था. वह लोहरदगा जोन का रीजनल कमांडर होने के साथ-साथ संगठन का सैनिक चीफ भी था. वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए इसलिए भी बड़ा सिरदर्द बना हुआ था क्योंकि वह तकनीकी रूप से काफी चालाक था. कुछ समय पहले गिरफ्तार हुए जोनल कमांडर रंथू उरांव ने पुलिस की पूछताछ में बताया था कि रविंद्र के पास सोनी कंपनी का एक रेडियो इंटरसेप्टर था. इस आधुनिक डिवाइस की मदद से वह घने जंगलों में बैठकर भी झारखंड पुलिस के वायरलेस सेट पर होने वाली गुप्त बातचीत को आसानी से सुन लेता था. पुलिस कब और किस तरफ से ऑपरेशन शुरू करने वाली है, इसकी जानकारी उसे पहले ही मिल जाती थी और वह अपना ठिकाना बदल लेता था.

    दस्ता बिखरा और अकेले पड़ते ही गिरफ्तार हो गया रविंद्र गंझू

    एक समय था जब रविंद्र गंझू के दस्ते में 21 से ज्यादा सक्रिय नक्सली शामिल थे. इस दस्ते में मुंशी जी, शीतल मोची, चंद्रभान मुंडा, अघनु गंझू और सूरजनाथ खेरवार जैसे कई नामी नक्सली शामिल थे, जो हमेशा AK-47 और AK-56 जैसे अत्याधुनिक हथियारों से लैस रहते थे. रंथू उरांव ने यह भी खुलासा किया था कि इस दस्ते की दो महिला नक्सली सुनीता और प्रमिला कुमारी पहले ही संगठन छोड़कर अपने घर लौट चुकी थीं. धीरे-धीरे पुलिस के बढ़ते दबाव के कारण रविंद्र का दस्ता बिखरने लगा. हाल के दिनों में झारखंड पुलिस के खुफिया तंत्र को यह पक्की खबर मिली थी कि रविंद्र गंझू अब अपने दस्ते से बिल्कुल अलग-थलग हो गया है और अकेले ही अपनी जान की सलामती के लिए इधर-उधर भटक रहा है. पुलिस ने इसी सटीक सूचना के आधार पर बिना कोई मौका गंवाए हेसला गांव की घेराबंदी की और उसे हथियार समेत दबोच लिया.

    Also Read : लातेहार पुलिस की बड़ी कामयाबी, 15 लाख रुपये के इनामी नक्सली रविंद्र गंझू को दबोचा 

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