आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गोवा के आदिवासी संगठनों ने एसटी राजनीतिक आरक्षण की मांग को और तेज करने का फैसला किया है. संगठनों की मांग है कि अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए विधानसभा सीटों पर आरक्षण 2011 की जनगणना के आधार पर लागू किया जाए.
यह फैसला विभिन्न आदिवासी संगठनों की बैठक में लिया गया. बैठक में प्रकाश वेलिप को एक बार फिर यूनाइटेड ट्राइबल एसोसिएशंस अलायंस (UTAA) का अध्यक्ष चुना गया. संगठन ने संकल्प लिया कि एसटी आरक्षण लागू होने तक आंदोलन जारी रहेगा और सरकार पर दबाव बढ़ाया जाएगा. आदिवासी संगठनों ने सरकार से मांग की है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर एसटी आरक्षण लागू किया जाए.
2011 की जनगणना पर ही जोर क्यों?
आदिवासी संगठनों का कहना है कि 2011 देश की आखिरी आधिकारिक जनगणना है. इसलिए विधानसभा सीटों का आरक्षण भी उसी के आधार पर तय किया जाना चाहिए. 2011 की जनगणना के अनुसार गोवा की कुल आबादी 14.58 लाख थी, जिसमें अनुसूचित जनजाति की आबादी 1.49 लाख यानी करीब 10.23 प्रतिशत दर्ज की गई थी. संगठनों का तर्क है कि जब उनकी आबादी करीब 10 प्रतिशत है, तो उन्हें उसी अनुपात में विधानसभा में राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए.
अभी क्या है स्थिति?
गोवा विधानसभा में कुल 40 सीटें हैं. फिलहाल एसटी समुदाय के लिए एक भी विधानसभा सीट आरक्षित नहीं है, जबकि एससी समुदाय के लिए एक सीट आरक्षित है. यदि 2011 की जनगणना के आधार पर आरक्षण लागू होता है, तो आबादी के अनुपात के हिसाब से एसटी समुदाय को करीब चार विधानसभा सीटें मिल सकती हैं. हालांकि, आरक्षित सीटों की अंतिम संख्या और उनका निर्धारण परिसीमन आयोग करेगा.
आंदोलन का नेतृत्व कौन कर रहा है?
यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि कई आदिवासी संगठन और नेता मिलकर इसे आगे बढ़ा रहे हैं. इनमें सबसे प्रमुख नाम पूर्व विधायक और यूनाइटेड ट्राइबल एसोसिएशंस अलायंस (UTAA) के अध्यक्ष प्रकाश वेलिप का है. उन्हें हाल ही में दोबारा अध्यक्ष चुना गया है और उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एसटी राजनीतिक आरक्षण लागू कराने के लिए आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है.
इसके अलावा गोविंद शिरोडकर, जो GAKUVED (गावड़ा, कुनबी, वेलिप और धनगर फेडरेशन) से जुड़े हैं, “मिशन पॉलिटिकल रिजर्वेशन फॉर एसटी” अभियान चला रहे हैं. वहीं, गोवा सरकार में जनजातीय कल्याण मंत्री रमेश तवडकर भी इस मांग के समर्थक हैं. गणेश गांवकर, गोविंद गौड़े और एंटोन वास जैसे नेता भी एसटी आरक्षण की मांग का समर्थन कर रहे हैं और सरकार से जल्द फैसला लेने की अपील कर रहे हैं.
बता दें कि गोवा में कुणबी, गावड़ा और वेलिप समुदायों को लंबे आंदोलन के बाद वर्ष 2003 में अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा मिला था. इससे पहले गोवा में धोड़िया (हलपती), डुबला (नाइकड़ा/नायका), सिद्धी और वारली समुदाय अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल थे. वर्तमान में राज्य में कुल सात समुदाय अनुसूचित जनजाति के रूप में अधिसूचित हैं.
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