Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार को माध्यमिक आचार्य नियुक्ति से जुड़े विवाद पर सुनवाई हुई। इस दौरान मामला काफी गंभीर मोड़ लेता दिखा, क्योंकि कोर्ट ने सीधे तौर पर झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से सवाल पूछ लिया कि अब तक इस पूरे प्रकरण में FIR क्यों दर्ज नहीं की गई है।
याचिकाकर्ताओं की दलील
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन ने कोर्ट में दलील दी कि बिना परीक्षा केंद्र के जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान किए और बिना दोषी अभ्यर्थियों को अलग किए, 2819 अभ्यर्थियों को एक साथ पुनर्परीक्षा के लिए बाध्य करना पूरी तरह मनमाना और अवैध कदम है। उन्होंने कहा कि यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के भी खिलाफ है, क्योंकि जो अभ्यर्थी किसी तरह की अनियमितता में शामिल नहीं हैं, उन्हें भी उसी दायरे में घसीटा जा रहा है और यह उनके साथ अन्याय है।
आयोग पर सवाल
सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि अगर परीक्षा में अनियमितता हुई है तो पहले उन केंद्रों और जिम्मेदार लोगों की पहचान होनी चाहिए जो इसमें शामिल थे। उसके बाद ही कार्रवाई की जानी चाहिए, न कि सभी अभ्यर्थियों को एक साथ दंडित किया जाए। इसी पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सवाल किया कि अब तक दोषियों पर FIR क्यों नहीं दर्ज की गई।
याचिका में क्या है मामला?
यह याचिका अर्चना कुमारी और अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दाखिल की गई है। इसमें झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के उस नोटिस को चुनौती दी गई है, जिसमें 2819 अभ्यर्थियों को 8 मई को होने वाली पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह फैसला एकतरफा और अन्यायपूर्ण है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई की तारीख 27 अप्रैल तय की है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि कोर्ट आगे क्या रुख अपनाता है और क्या आयोग को अपने फैसले पर स्पष्टीकरण देना होगा।
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