Ranchi : झारखंड में अवैध खनन से जुड़े वाहनों की नीलामी मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के कामकाज पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ सवाल किया कि जब समस्या का समाधान लाना चाहिए था, तब सरकार देरी क्यों कर रही है। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से मामले में एक महीने का समय मांगा गया, जिस पर कोर्ट ने सख्ती से टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि आम लोगों की समस्याओं का जल्दी समाधान होना चाहिए, लेकिन यहां उल्टा मामला लटकता दिख रहा है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला अवैध खनन के परिवहन के दौरान पकड़े गए एक हाइवा वाहन से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, याचिकाकर्ता अशोक सिंह का हाइवा पहले गया जिले से चोरी हो गया था। इसको लेकर प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी। बाद में यही वाहन लातेहार के बालूमाथ इलाके में अवैध खनन परिवहन के दौरान पकड़ा गया। आरोप है कि जब्ती के बाद वाहन की नीलामी जल्दबाजी में कर दी गई और उसे तीसरे पक्ष को कम कीमत पर बेच दिया गया, जबकि मामले से जुड़ी रिवीजन याचिका लंबित थी।
तत्कालीन डीसी से भी कोर्ट ने पूछा सवाल
सुनवाई के दौरान लातेहार के तत्कालीन उपायुक्त भोर सिंह यादव वर्चुअल रूप से कोर्ट के सामने पेश हुए। कोर्ट ने उनसे भी कड़ा सवाल पूछा कि अगर समस्या उनके कार्यकाल में पैदा हुई, तो अब तक उसका समाधान क्यों नहीं निकला। मौजूदा लातेहार डीसी संदीप कुमार भी कोर्ट में मौजूद रहे। अदालत ने दोनों अधिकारियों के सामने साफ संकेत दिया कि ऐसे मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
मुख्य सचिव को भी देखने को कहा मामला
हाईकोर्ट ने सिर्फ नाराजगी जताकर बात खत्म नहीं की। अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को भी इस मामले पर नजर डालने को कहा है।कोर्ट ने सरकार को एक महीने का समय दिया है ताकि वह इस मामले में ठोस समाधान लेकर आए। अब इस केस की अगली सुनवाई 17 जून को होगी।
सवाल सिर्फ एक वाहन का नहीं
यह मामला सिर्फ एक वाहन की नीलामी तक सीमित नहीं दिख रहा। सवाल प्रशासनिक फैसलों, प्रक्रिया की पारदर्शिता और आम लोगों के अधिकारों से भी जुड़ गया है। अगर किसी व्यक्ति को अपनी बात रखने का मौका दिए बिना उसकी संपत्ति की नीलामी कर दी जाए, तो यह गंभीर मामला बन जाता है। अब सबकी नजर अगली सुनवाई पर टिकी है।
