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    Home»झारखंड»अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त,9 मार्च तक तोड़ी जायेंगी 24 इमारतें… जानें कहां
    झारखंड

    अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त,9 मार्च तक तोड़ी जायेंगी 24 इमारतें… जानें कहां

    Team JoharBy Team JoharJanuary 29, 2026Updated:January 29, 2026No Comments3 Mins Read9
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    हाईकोर्ट
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    Jamshedpur : झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने जमशेदपुर में अवैध निर्माण मामले में दर्ज कई याचिकाओं पर सुनवाई की। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी याचिकाएं खारिज कर कड़ी फटकार लगाई और अवैध निर्माण को ध्वस्त करने की आखिरी तारीख 9 मार्च तय कर दी।

    अदालत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति अवैध निर्माण के खिलाफ याचिका दाखिल करता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब तक कोई भी ऐसा दस्तावेज पेश नहीं कर सका जिससे यह साबित हो सके कि निर्माण नियमानुसार किया गया। अवैध निर्माण को बचाने का अधिकार क्यों चाहिए। इसके चलते किसी को पानी और किसी को सूर्य की रोशनी नहीं मिली रही है। अदालत ने कहा, “ईमानदारी से जीने वाले और कानून का पालन करने वाले नागरिकों का जीवन बर्बाद किया गया है। ऐसे मामलों में कोर्ट राहत नहीं दे सकती।”

    कोर्ट ने जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) को निर्देश दिया कि नौ मार्च तक जेएनएसी 24 अवैध निर्माण को ध्वस्त करे और शपथ पत्र दाखिल करे। अगली सुनवाई नौ मार्च को होगी। इस मामले में याचिका राकेश कुमार झा की ओर से दायर की गई थी, जबकि प्रार्थियों का पक्ष अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने रखा।

    पिछली सुनवाई में अदालत ने जेएनएसी को निर्देश दिया था कि समिति के क्षेत्र में किए गए अवैध निर्माण एक माह के भीतर ध्वस्त किए जाएं। कोर्ट ने राज्य सरकार को भी निर्देश दिया कि वह आदेश के पालन के लिए जेएनएसी को हरसंभव सहयोग प्रदान करे। नगर विकास सचिव, डीसी और एसएसपी को जेएनएसी को सहयोग में किसी भी कमी के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है।

    अदालत ने कहा कि पूर्व आदेश हाईकोर्ट द्वारा गठित अधिवक्ताओं की समिति, प्रार्थियों और प्रतिवादियों के पक्ष सुनने के बाद दिया गया था। वकीलों की समिति ने यह रिपोर्ट प्रस्तुत की थी कि शहर में हुए अवैध निर्माण को तोड़ना ही एकमात्र विकल्प है। अदालत ने एक बार फिर कहा कि इसमें जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति की सांठगांठ शामिल रही।

    हाईकोर्ट ने जांच के लिए तीन अधिवक्ताओं की समिति बनाई थी। समिति की रिपोर्ट में कहा गया कि निजी प्रतिवादियों द्वारा किए गए निर्माण कानून के अनुरूप नहीं हैं। समिति ने यह भी पाया कि भवन उपनियमों का पालन न होना और संबंधित अधिकारियों की प्रभावी निगरानी न होना मुख्य कारण हैं, जिसके चलते ईमानदार और कानून का पालन करने वाले नागरिक प्रभावित हो रहे हैं।

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