प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने 10 हजार रुपये की जुर्माना लगाई है. बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान हेमंत सोरेन की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा गया. जवाब दाखिल करने में हुई देरी पर अदालत ने नाराजगी जताई और 10 हजार रुपये की जुर्माना लगाते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी.
क्या है पूरा मामला
यह मामला जनवरी 2024 में दर्ज उस FIR से जुड़ा है, जो तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की शिकायत पर रांची के एससी-एसटी थाने में ईडी के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई थी. जमीन घोटाले से जुड़ी जांच के दौरान ईडी की कार्रवाई के बाद सोरेन ने अधिकारियों पर उत्पीड़न और उनके अधिकारों के हनन का आरोप लगाया था. इसके बाद ईडी के अधिकारियों ने अपने खिलाफ दर्ज FIR और उससे जुड़ी आपराधिक कार्रवाई को चुनौती देते हुए झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया. ईडी अधिकारियों की ओर से दाखिल याचिका में FIR को रद्द करने की मांग की गई है. मामले में हेमंत सोरेन प्रतिवादी हैं.
विवाद की शुरुआत जनवरी 2024 में ईडी की दिल्ली स्थित उस जगह पर तलाशी से हुई थी, जिसका इस्तेमाल हेमंत सोरेन कर रहे थे. यह कार्रवाई कथित जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में हुई थी. इसके बाद सोरेन की ओर से ईडी अधिकारियों के खिलाफ एससी-एसटी थाने में शिकायत दी गई.
शिकायत के आधार पर अधिकारियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया. ईडी अधिकारियों ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की और कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप उनके आधिकारिक दायित्वों के निर्वहन से जुड़े हैं.
2024 में हाईकोर्ट ने ईडी अधिकारियों को दी थी अंतरिम राहत
ईडी अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मार्च 2024 में उनके खिलाफ तत्काल कोई जबरदस्ती कार्रवाई नहीं लेने का निर्देश दिया था. अधिकारियों ने अदालत के समक्ष यह भी दलील दी थी कि कार्रवाई PMLA के तहत आधिकारिक कर्तव्य के दौरान की गई थी.
मामले में FIR की वैधता और ईडी अधिकारियों की याचिका पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है. अब जवाब दाखिल किए जाने के बाद हाईकोर्ट इस मामले की आगे सुनवाई करेगा. अगली सुनवाई 2 नवंबर को निर्धारित की गई है.

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